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अमेरिका: भारतीय मूल के कारोबारी को पांच साल की जेल, 2.7 करोड़ डॉलर की आय छिपाने का आरोप; कैसे हुआ खुलासा?

Sat, 12 Sep 2026 12:17 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, वाशिंगटन।

सार

टैक्स बचाने के नाम पर ऐसी स्कीम चलाई गई, जिसमें ग्राहकों की 2.7 करोड़ डॉलर से ज्यादा की आय सरकार से छिपाने में मदद की गई। ट्रस्ट के जरिए निजी खर्चों को भी टैक्स कटौती में दिखाने का खेल चला, लेकिन आखिर यह पूरा फर्जीवाड़ा कैसे पकड़ा गया और भारतीय मूल के शख्स को पांच साल की जेल क्यों हुई? पढ़िए रिपोर्ट
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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अमेरिका के टेक्सास में भारतीय मूल के एक व्यक्ति को कर (टैक्स) चोरी के मामले में पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई है। उस पर अपने ग्राहकों को टैक्स से बचने में मदद करने का आरोप था। उसने सरकार से 2.7 करोड़ डॉलर से ज्यादा की आय छिपाने में भी मदद की।
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किसे मिली सजा?
टेक्सस के जोन्सटाउन निवासी आनंद शुक्ला ने अपना अपराध कबूल कर लिया था। अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, उसने अमेरिका को धोखा देने की साजिश में शामिल होने की बात मानी। वह देशभर के कारोबारियों को फर्जी टैक्स योजना बेचने में शामिल था। टेक्सस की पश्चिम जिला अदालत ने शुक्ला को 60 महीने यानी पांच साल जेल की सजा सुनाई।

टैक्स बचाने की योजना क्या थी?
अदालत के दस्तावेजों और कोर्ट में दिए बयानों के मुताबिक, आनंद शुक्ला और उसके साथियों ने 2017 से 2025 के बीच एक टैक्स योजना चलाई। वे इस योजना का प्रचार करते थे। इसे ग्राहकों को बेचते भी थे। वे खुद भी इसका इस्तेमाल करते थे। इस योजना में ग्राहकों से कहा जाता था कि वे कुछ भी अपने नाम पर न रखें, लेकिन हर चीज पर उनका नियंत्रण रहे।
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इसके जरिये उन्हें अपने कारोबार की लगभग पूरी कमाई पर टैक्स खत्म करने का भरोसा दिया जाता था। साथ ही, उनके पैसे पर उनका पूरा नियंत्रण रहने की बात कही जाती थी। इस योजना के लिए ग्राहकों से 2.25 लाख डॉलर तक का शुल्क लिया जाता था।   

ग्राहकों को कैसे फंसाया गया?
शुक्ला ने पूरे अमेरिका में इस योजना का प्रचार किया। इसके लिए सेमिनार और वेबिनार किए गए। पॉडकास्ट के जरिये भी प्रचार किया गया। सीधे ग्राहकों से संपर्क कर उन्हें यह योजना बेची गई। 

कमाई छिपाने का तरीका क्या था?
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, आनंद शुक्ला ग्राहकों को अपनी कंपनियों का ढांचा बदलने के लिए कहता था। वह कहता था कि कारोबार की करीब 98 प्रतिशत कमाई कई ट्रस्टों और एक निजी फैमिली फाउंडेशन के जरिये भेजी जाए। इस तरह कारोबार की कमाई को सरकार से छिपाने की कोशिश की जाती थी।

शुक्ला ग्राहकों से कहता था कि वे अपने निजी खर्च भी ट्रस्ट के खातों से करें। इन खर्चों में गाड़ियां, मनोरंजन और घर की किस्त जैसे खर्च शामिल थे। वह ग्राहकों से इन खर्चों को टैक्स में कटौती के तौर पर दिखाने के लिए कहता था।

आनंद शुक्ला की कमाई कितनी थी?
शुक्ला आमतौर पर इन ट्रस्ट पैकेज को 25 हजार से 55 हजार डॉलर में बेचता था। वह ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज भी तैयार करता था। दूसरे लोगों को इस योजना को बेचने की ट्रेनिंग देता था। वह ग्राहकों को ऐसे टैक्स तैयार करने वालों के पास भी भेजता था, जिन्हें उसने खुद चुना था और जिनके बारे में उसे पता था कि वे इस योजना में शामिल होंगे।
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कितनी रकम छिपाई गई?
अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, आनंद शुक्ला ने अमेरिकी कर विभाग यानी आईआरएश से 2.7 करोड़ डॉलर से ज्यादा की आय छिपाने में मदद की।
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