भारतीय मूल के अरिंजय बनर्जी (फाइल फोटो)
- फोटो : Twitter
160 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में लेने वाले कोरोना वायरस का अबतक कोई सटीक इलाज नहीं मिल पाया है। वहीं कई देशों के वैज्ञानिक लगातार इसपर शोध कर रहे हैं ताकि इसे फैलने से रोका जा सके। इसी बीच कनाडा के शोधकर्ताओं की एक टीम इसका इलाज ढूंढने में लगी हुई है। इस टीम में एक भारतवंशी भी शामिल हैं। जिनका नाम अरिंजय बनर्जी है।
टोरोंटो के सन्नीब्रूक अस्पताल, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरोंटो और मैकमास्टर यूनिवर्सिटी की टीम के शोधकर्ताओं ने कथित तौर पर उस वायरस को अलग (आइसोलेट) करने में कामयाबी हासिल कर ली है जिसकी वजह से कोविड-19 होता है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस महामारी का इलाज मिल जाएगा।
भारतवंशी अरिंजय मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शियस डिसीज रिसर्च में पोस्ट डॉक्टोरल छात्र हैं। वे कोरोना वायरस और चमगादड़ों के मामलों के विशेषज्ञ हैं। उनकी टीम लैब में जो परीक्षण करेगी उसकी मदद से वैज्ञानिकों को इस वायरस के मरीजों का बेहतर इलाज, परीक्षण, इंजेक्शन बनाने और जीव विज्ञान की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
बनर्जी ने एख इंटरव्यू में कहा, 'अब जब हमने SARS-CoV-2 वायरस को अलग कर दिया है (कोविड-19 के लिए जिम्मेदार) तो हम इसे अन्य शोधकर्ताओं के साथ साझा करेंगे और इस टीम वर्क को जारी रखेंगे।' उनकी टीम यूनिवर्सिटी ऑफ टोरोंटो में परीक्षण कार्य कर रही है।
टीम ने हाल ही में दो मरीजों के नमूनों से वायरस को पृथक (आइसोलेट) किया है। इससे दुनिया को वायरस के व्यवहार की समझ बढ़ाएगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि वायरस को पृथक करने से महामारी के इलाज करने में मदद मिलेगी। अरंजिय की टीम में सन्नीब्रूक अस्पताल के डॉक्टर रॉब कोजाक और डॉक्टर कैरन मोसमैन, मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के फेलो रिसर्चर डॉक्टर समीरा मुबारेका शामिल हैं।
डॉक्टर समीरा एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं और सन्नीब्रूक अस्पताल में इंफेक्शियस डिसीजीस फिजिशियन भी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम को अब कोरोना वायरस का इलाज विकसित करने के लिए प्रमुख उपकरणों की आवश्यकता है। इसका लंबे समय तक चलने वाला समाधान गहन शोध के जरिए मिलेगा।