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अमेरिका मध्यावधि चुनाव: सुहास सुब्रमण्यन, पिया डांडिया के बाद रो खन्ना की जीत, जानें कौन-कौन भारतवंशी जीते

Wed, 04 Nov 2026 11:32 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के चेहरों की चर्चा तेज है। चुनावी नतीजों में पिया डांडिया ने पहली बार जीत हासिल की, तो सुहास सुब्रमण्यम ने अपनी सीट बरकरार रखी। वहीं, अरुणा मिलर को भी दोबारा लेफ्टिनेंट गवर्नर बनने का मौका मिला। आइए जानते हैं, किस-किस भारतीय मूल के चेहरे ने जीत हासिल की है। पढ़ें पूरी खबर

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अमेरिका मध्यावधि चुनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के परिणाम और रुझान सामने आने लगे हैं, जिनमें भारतीय-अमेरिकी नेताओं का मिला-जुला प्रदर्शन देखने को मिला है। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया से अपनी सीट बरकरार रखी है, जबकि पिया दांडिया फ्लोरिडा से जीत दर्ज कर पहली बार अमेरिकी कांग्रेस (प्रतिनिधि सभा) में पहुंची हैं। भारतीय-अमेरिकी पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीत लिया है। उन्होंने इस चुनाव में मरीन वेटरन (पूर्व सैनिक) केसी असकर को हराया।
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कितने प्रतिशत वोट मिले?
मंगलवार को घोषित नतीजों के अनुसार, हाई स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल डांडिया ने 51.9 प्रतिशत वोट हासिल किए और वह नई भारतीय-अमेरिकी अमेरिकी कांग्रेसवुमन बन गई हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी असकर को 49.1 प्रतिशत वोट मिले।

कौन हैं पिया डांडिया?
कैंपेन की वेबसाइट के अनुसार, डांडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी हैं। उन्होंने अपना करियर समुदायों को मजबूत बनाने में समर्पित किया है। एक हाई स्कूल प्रिंसिपल, पॉलिसी लीडर और टेक्नोलॉजी इनोवेटर के रूप में। फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में जन्मी और पली-बढ़ीं डांडिया ने अपने करियर की शुरुआत एक टीचर के रूप में की थी और वह हार्लेम में एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल भी रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक डांडिया ने अपने करियर के शुरुआती दौर में दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में बच्चों को पढ़ाया, इस अनुभव ने उन्हें आर्थिक रूप से वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से अवगत कराया।
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उन्होंने एक हाई स्कूल की स्थापना की, जिसका लक्ष्य कम आय वाले छात्रों के जीवन की दिशा बदलना था, ताकि उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता के रास्ते पर लाया जा सके। उनके हाई स्कूल से पास होने वाले सभी छात्रों को कॉलेज में दाखिला मिला, जबकि उनमें से 86 प्रतिशत छात्र कम आय वाले परिवारों से आते थे। कैंपेन वेबसाइट के अनुसार, 28 साल की उम्र में वह अपने स्कूल की फाउंडिंग प्रिंसिपल बनीं, जिससे वह देश की सबसे कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में से एक बन गईं।
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में काम कर चुके भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम एक बार फिर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य चुने गए हैं। 40 वर्षीय सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की। उन्हें 61.5 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जबकि उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डेव बेकविथ को 36.4 प्रतिशत मत मिले।

भारतीय माता-पिता के घर ह्यूस्टन में हुआ जन्म
ह्यूस्टन में भारतीय माता-पिता के घर जन्मे सुब्रमण्यम ने न्यू ऑरलियन्स की टुलने यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान सेवा भाव सीखा। वहां उन्होंने 'हरिकेन कैटरीना' से प्रभावित समुदायों के पुनर्निर्माण के लिए स्वयंसेवकों को संगठित करने में मदद की थी।

ओबामा प्रशासन में व्हाइट हाउस के तकनीकी नीति सलाहकार रहे
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से ऑनर्स के साथ लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद सुब्रमण्यम ने राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी नीति सलाहकार के रूप में काम किया। व्हाइट हाउस में काम करने के बाद उन्होंने लाउडन काउंटी में अपना छोटा व्यवसाय शुरू किया। साथ ही, उन्होंने स्वयंसेवक EMT (आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन) और फायरफाइटर के रूप में भी सेवाएं दीं।

2019 में वर्जीनिया की विधानसभा के लिए चुने गए
सुब्रमण्यम 2019 में वर्जीनिया जनरल असेंबली के लिए चुने गए थे और उन्होंने वहां दो कार्यकाल पूरे किए। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए 2024 में चुने जाने से पहले वह वर्जीनिया राज्य सीनेट के सदस्य भी रहे थे। अब वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत हासिल कर उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना स्थान बरकरार रखा है।

अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में एक और कार्यकाल जीता
मैरीलैंड में, भारतीय-अमेरिकी लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने एक और कार्यकाल हासिल किया है। मिलर, जो डेमोक्रेटिक टिकट पर मूर के साथ चुनाव लड़ रही थीं, उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के लेफ्टिनेंट गवर्नर उम्मीदवार रॉब क्रोप को हराया। क्रोप, राज्य के पूर्व डेलीगेट डैन कॉक्स के साथी उम्मीदवार (रनिंग मेट) थे। उनके फिर से चुने जाने से देश के सबसे ऊंचे राज्य कार्यकारी पदों में से एक में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व बना रहेगा। 
 

विवेक रामास्वामी को मिली हार
डेमोक्रेटिक पार्टी की एमी एक्टन ने ओहायो के गवर्नर पद के चुनाव में भारतीय मूल के रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को हरा दिया है। इस हार को राज्य में रिपब्लिकन पार्टी के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। यहां पहले गवर्नर का पद इसी पार्टी के पास था। अमेरिकी समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ओहायो के गवर्नर पद का चुनाव 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल था। इस चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी का मुकाबला डेमोक्रेट एमी एक्टन से था। दोनों उम्मीदवार निवर्तमान रिपब्लिकन गवर्नर माइक डिवाइन की जगह लेने के लिए मैदान में थे।

रामास्वामी भारतीय मूल के कारोबारी और बायोटेक्नोलॉजी उद्यमी हैं। उनके माता-पिता केरल से अमेरिका गए थे। वह पहले रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की कोशिश भी कर चुके हैं। गवर्नर चुनाव में उनकी हार भारतीय मूल के उन उम्मीदवारों के लिए बड़ा झटका रही, जिनकी नजर राज्य के शीर्ष कार्यकारी पद पर थी। अगर रामास्वामी जीतते तो वह भारतीय मूल के अमेरिका के तीसरे गवर्नर बन सकते थे। उनसे पहले बॉबी जिंदल और निक्की हेली इस पद पर रह चुके हैं। वह किसी अमेरिकी राज्य के पहले हिंदू गवर्नर भी बन सकते थे।

रो खन्ना ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव फिर जीता 
डेमोक्रेटिक पार्टी के रो खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव फिर जीत लिया है। इस जीत के साथ उन्होंने सदन में अपनी सीट बरकरार रखी है। रो खन्ना इस्राइल को लेकर ट्रंप की नीतियों के मुखर आलोचकों में शामिल हैं। उन्होंने ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए आगे और फंडिंग रोकने की भी मांग की थी।


 

प्रमिला जयपाल आगे, अमी बेरा भी बढ़त में
वाशिंगटन के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल भी दोबारा चुनाव लड़ रही थीं। उनके मुकाबले में रिपब्लिकन उम्मीदवार नीरव सेठ थे। गुजरात में जन्मे नीरव अमेरिकी मरीन में सेवा दे चुके हैं। उपलब्ध रुझानों में प्रमिला जयपाल 1.5 लाख से अधिक वोटों की बढ़त बनाए हुए थीं। प्रमिला जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं। वह 2017 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उनकी जीत से सदन में भारतीय मूल की महिला सांसद के रूप में उनका प्रतिनिधित्व जारी रहने की संभावना थी।

कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक सांसद अमी बेरा भी अपनी सीट बचाने के लिए चुनाव मैदान में थे। वह भारतीय मूल के वरिष्ठ सांसदों में से एक हैं। उनके माता-पिता गुजरात के राजकोट से अमेरिका गए थे। उपलब्ध रुझानों में अमी बेरा अपने प्रतिद्वंद्वी से 25 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे।

एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अमीश शाह भी चुनावी मुकाबले में थे। पेशे से चिकित्सक और राज्य के पूर्व प्रतिनिधि अमीश शाह रिपब्लिकन उम्मीदवार जे फीली को चुनौती दे रहे थे। उपलब्ध रुझानों में वह आगे चल रहे थे। इससे पहले भी वह 2024 में इस सीट से चुनाव लड़ चुके थे, लेकिन रिपब्लिकन उम्मीदवार डेविड श्वाइकर्ट से मामूली अंतर से हार गए थे।
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महेश गनोर्कर को हार, अन्य उम्मीदवारों के नतीजे स्पष्ट नहीं
नॉर्थ कैरोलिना के चौथे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार महेश 'मैक्स' गनोर्कर को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार वैलेरी फौशी के हाथों हार का सामना करना पड़ा है। उपलब्ध रुझानों में करीब 78 फीसदी वोटों की गिनती के बाद फौशी को 82.9 फीसदी और गनोर्कर को 15.6 फीसदी वोट मिले थे।

टेक्सास के 47वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पूजा सेठी भी चुनाव मैदान में थीं। पेशे से वकील पूजा पहले टेक्सास विधायिका में चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर काम कर चुकी हैं। उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार जेनिफर मुश्टालर से था। इस सीट पर अभी रुझान स्पष्ट नहीं हैं।

टेक्सास के 66वें हाउस डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार संदीप श्रीवास्तव भी चुनाव लड़ रहे थे। वह कारोबारी और सामुदायिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने इस सीट पर पांच कार्यकाल से काबिज रिपब्लिकन विधायक को चुनौती दी थी। इस सीट पर भी अभी रुझान स्पष्ट नहीं हैं। 

न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमातिरेड्डी अटॉर्नी जनरल के पद के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स को चुनौती दे रही थीं। वहीं, विस्कॉन्सिन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोश कौल अटॉर्नी जनरल के रूप में दोबारा चुनाव लड़ रहे थे। इन मुकाबलों के नतीजे भी उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं हैं।

इसके अलावा जॉर्जिया की राज्य विधायिका के चुनाव में भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट ज्योत सिंह अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी यासीन मोघाजी से आगे चल रहे थे। हालांकि, उनकी जीत की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी।

तीन नवंबर को हुए मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) के नतीजे यह तय करेंगे कि 435 सदस्यीय 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' और 35 सीनेट सीटों पर किसका नियंत्रण होगा। इसके साथ ही, गवर्नर के पदों और राज्य विधायी कार्यालयों के लिए भी नतीजे तय होंगे। ये नतीजे भारतीय-अमेरिकी नेताओं के लिए केवल शुरुआती रुझान हैं, जबकि कई अन्य सीटों पर स्थिति अभी स्पष्ट होना बाकी है।
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