कनाडा की राजधानी ओटावा और टोरंटो शहर में भारतीय मिशन ने रविवार को 1985 में हुए कनिष्क बम विस्फोट की 39वीं बरसी मनाई। इस घटना में एअर इंडिया के विमान में सवार 86 बच्चों समेत 329 लोगों की मौत हो गई थी।
उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने दी श्रद्धांजलि
उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने घटना में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, ‘“दुनिया में किसी भी देश की सरकार को राजनीतिक लाभ के लिए अपने क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाले आतंकवाद के खतरे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मानव जीवन राजनीतिक हितों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। इससे पहले कि आतंकी गतिविधियां बड़े पैमाने पर मानवता को नुकसान पहुंचाना शुरू करें, आतंकके खिलाफ कानूनी व सामाजिक कार्रवाई की जानी चाहिए। सरकारों, सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को आतंकवादी नेटवर्क को नष्ट करने, उनके वित्तपोषण को रोकने और उनकी विकृत विचारधाराओं का मुकाबला करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।”
इससे पहले, टोरंटो में स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “महावाणिज्य दूत सिद्धार्थ नाथ ने 39 साल पहले इसी दिन एआई 182 में हुए बम विस्फोट में जान गंवाने वाले 329 लोगों की याद में एअर इंडिया 182 स्मारक, हंबर पार्क, एटोबिकोक पर पुष्पांजलि अर्पित की।”
वर्ष 1985 का कनिष्क बम विस्फोट इतिहास में आतंकवाद के सबसे बुरे कृत्यों में शुमार : जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि 1985 में ‘कनिष्क’ विमान पर हुआ हमला इतिहास में आतंकवाद के सबसे बुरे कृत्यों में से एक है। बम विस्फोट की घटना के 39 साल पूरे होने पर उनकी यह टिप्पणी कनाडा की धरती से खालिस्तानी चरमपंथियों की बढ़ती गतिविधियों के कारण भारत और कनाडा के बीच संबंधों में तनाव के बीच आई।
जयशंकर ने एक्स’ पर कहा, 'आज इतिहास में आतंकवाद के सबसे बुरे कृत्यों में से एक के 39 साल पूरे हो गए। मैं एआई-182 ‘कनिष्क’ के 329 पीड़ितों की स्मृति में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो 1985 में इसी दिन मारे गए थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिवारों के साथ हैं।’’
वहीं, 'कनिष्क' बम विस्फोट के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 'एक्स' पर लिखा, "23 जून 1985 को हुआ यह कायरतापूर्ण बम विस्फोट भारत के खिलाफ किए गए सबसे निंदनीय आतंकी कृत्यों में से एक है।" उन्होंने कहा कि इस तरह के चरमपंथ से प्रेरित कृत्यों के लिए एक समझदार और सभ्य दुनिया में कोई स्थान नहीं है।
1985 में लैंडिंग से पहले ही हुआ था विस्फोट
मॉन्ट्रियल-नयी दिल्ली एअर इंडिया ‘कनिष्क’ उड़ान संख्या-182 में 23 जून 1985 को लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतरने से 45 मिनट पहले विस्फोट हो गया, जिससे विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। इनमें ज्यादातर भारतीय मूल के कनाडाई थे।
माना जाता है कि साल 1984 में स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए चलाए गए 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' के जवाब में सिख आतंकवादियों ने कनिष्क बम विस्फोट को अंजाम दिया था।