दुष्कर्म के मामले में निर्वासन का यह पहला मामला माना जा रहा है। आमतौर पर निर्वासन की कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने या युद्ध अपराध जैसे दोष, गंभीर किस्म के संगठित अपराध, उग्रवाद या आतंकी कार्रवाई की प्रशंसा करने जैसे मामलों में ही करने की परंपरा रही है।
निचली अदालत ने दे दी थी छूट
आरएसडी ने गृह सचिव के आदेश के खिलाफ निचली अदालत में अपील की थी, जिसमें नागरिकता खत्म करने के लिए गृह विभाग की तरफ से दिए गए तर्क को पर्याप्त नहीं माना गया था। लेकिन आव्रजन व शरण चैंबर के अपर ट्रिब्यूनल ने गृह सचिव के आदेश को सही मानते हुए आरएसडी को तथ्यों के गलत प्रस्तुतिकरण का दोषी माना था। इसके चलते अब आरएसडी का भारत निर्वासित होना तय माना जा रहा है।