श्रीलंका के राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे
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श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने भारत से मदद की मांग की है। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने मांग की है कि आर्थिक चुनौतियों, डिजिटल प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण, सुशासन स्थापित करने में भारत उनकी मदद करे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति विक्रमसिंघे के निमंत्रण पर 1 अप्रैल 2023 को दो दिवसीय यात्रा पर श्रीलंका गई है।
एसनीजीसी महानिदेशक, भारत के श्रीलंकाई राजदूत गोपाल बागले, एसोसिएट प्रोफेसर एपी सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी प्रतिनिधि मंडल में शामिल हैं। मीटिंग के दौरान राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने श्रीलंका के आर्थिक विकास के अपने विचार साझा किए। अच्छी राजव्यवस्था, डिजिटलिकरण, नए संस्थान के विकास सहित आर्थिक विकास पर बैठक केंद्रित रही।
प्रधानमंत्री के विजन के बारे में बताया
श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा कि वह भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास से काफी प्रेरित हैं। एनसीजीसी से राष्ट्रपति ने मदद की मांग करते हुए कहा कि वह अच्छी पॉलिसी और अच्छी राजव्यवस्था बनाने में उनकी मदद करें। महानिदेशक ने बताया कि कैसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी नीतियों से प्रदेश को विजन दिया। गुजरात पिछले 20 सालों से आर्थिक विकास कर रहा है। प्रधानमंत्री की अच्छी राजव्यवस्था, पारदर्शी और जवाबदेह है।
प्रधानमंत्री के वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन की तरह एनसीजीजी विदेश मंत्रालय के साथ सिविल सेवकों के सहयोग और सीखने को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। चर्चा के दौरान लंका के राष्ट्रपति ने अनुरोध किया कि एनसीजीजी हमें आवश्यक सहायता प्रदान करे। भारत तेजी से सामाजिक-आर्थिक विकास और उच्च आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल गवर्नेंस और भागीदारी नीतियों का निर्माण कर रहा है।
डिजिटलीकरण पर भी जोर दिया
भरत लाल ने प्रधानमंत्री के पड़ोसी पहले के मंत्र के बारे में बात की और विशेष संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कुशल, प्रभावी और प्रौद्योगिकी संचालित सार्वजनिक सेवा वितरण सुनिश्चित करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और दृष्टि की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ सुशासन पर जोर देने के लिए भी कहा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पारदर्शिता, इक्विटी, समावेशन और जवाबदेही को बढ़ावा देने में डिजिटल प्रौद्योगिकी के सकारात्मक प्रभाव पर जोर दिया।