पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोर्ट में पेशी के मौके पर अमेरिका में तनाव का माहौल है। ट्रंप ऐसे पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं, जिन पर कोर्ट में आपराधिक अभियोग तय किया जाएगा। पिछले दिनों न्यूयॉर्क की अदालत की जूरी ने उन्हें पोर्न स्टार स्टॉर्मी डैनियल्स को चुप रहने के लिए पैसा देने का दोषी हराया था। आरोप है कि डैनियल्स के ट्रंप से यौन संबंध थे। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप ने उन्हें भुगतान कराया था।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि कानूनी रूप से ट्रंप भले मुसीबत में नजर आ रहे हों, लेकिन इस मौके का सियासी फायदा उठाने की रणनीति उन्होंने बनाई है। ट्रंप 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी पाने की होड़ में उतर चुके हैं। पार्टी के भीतर उनके लिए समर्थन बढ़ने के लगातार संकेत मिल रहे हैं। सोमवार को टीवी चैनल सीएनएन की तरफ से कराए गए एक जनमत सर्वे से सामने आया कि रिपब्लिकन पार्टी समर्थक 79 फीसदी मतदाता ट्रंप पर चलाए जा रहे मुकदमे से खफा हैं।
इस मुकदमे का एक असर यह हुआ है कि रिपब्लिकन पार्टी के वे नेता भी ट्रंप के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं, जो पार्टी उम्मीदवारी की होड़ में ट्रंप को चुनौती देने की तैयारी में थे। इनमें सबसे प्रमुख नाम फ्लोरिडा राज्य के गवर्नर रॉन डिसैंटिस का है। डिसैंटिस ने न्यूयॉर्क जूरी के फैसले की कड़ी निंदा की है। विश्लेषकों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के बीच ट्रंप की जैसी ऊंची लोकप्रियता है, उसे देखते हुए पार्टी के तमाम नेता इस मुद्दे पर ट्रंप का समर्थन करने पर मजबूर हो रहे हैं।
ट्रंप ने इस कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न बताया है। पिछले हफ्ते एक बयान में उन्होंने कहा था- ‘उत्पीड़न की यह कार्रवाई जो बाइडन को उलटी पड़ेगी। अमेरिकी जनता यह समझ रही है कि रैडिकल डेमोक्रेट असल में क्या कर रहे हैं। यह सबको नजर आ रहा है। इसीलिए हमारा आंदोलन और हमारी पार्टी एकजुट और मजबूत हैं। पहले हम एल्विन ब्रैग को हराएंगे और फिर जो बाइडन को। हम एक-एक दलाल डेमोक्रेट को उखाड़ फेंकेंगे, ताकि हम फिर से अमेरिका को महान बना सकें।’
एल्विन ब्रैग इस मामले में अटार्नी हैं और समझा जाता है कि उनकी पहल पर ही जूरी ने इस मामले में ट्रंप को दोषी माना है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह मामला ट्रंप के अनोखे राजनीतिक करियर में एक नया मोड़ साबित हो सकता है। उनके राष्ट्रपति रहते हुए उन पर दो बार महाभियोग चलाया गया था। 2020 में चुनाव हारने के बाद उन्होंने नतीजे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और जिस कारण उनके समर्थकों ने छह जनवरी 2021 को कैपिटॉल हिल (संसद भवन) पर धावा बोल दिया था। लेकिन इन तमाम घटनाओं से ट्रंप के समर्थन आधार पर कोई फर्क नहीं पड़ा। ताजा मामले से भी इसमें सेंध लगने की संभावना नहीं है।
दूसरी तरफ ट्रंप के आलोचकों ने इस घटनाक्रम का स्वागत किया है। उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में सजायाफ्ता होकर ट्रंप 2024 के चुनाव मैदान से हट जाएंगे, जिससे अमेरिका फिर से उनका शासनकाल देखने से बच जाएगा।