एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर को यूक्रेन के लिए गोला-बारूद खरीद के 7 करोड़ यूरो के विवादित सौदे के बाद इस्तीफा देना पड़ा। इस सौदे में भारतीय कंपनी के स्वामित्व वाली फर्म शामिल थी। भुगतान के बावजूद आपूर्ति में देरी हुई और 2025 में मिले गोला-बारूद की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे। आखिर इस सौदे में ऐसा क्या हुआ कि मामला मंत्री के इस्तीफे तक पहुंच गया? पढ़िए रिपोर्ट
यूक्रेन के लिए 7 करोड़ यूरो (768.50 करोड़ रुपये से अधिक) के गोला-बारूद खरीद के विवादित सौदे के चलते एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर को इस्तीफा देना पड़ा। सौदे में ऐसी कंपनी शामिल थी, जिसका स्वामित्व भारतीय कंपनी के पास है और जिसके पास इससे पहले गोला-बारूद बेचने का कोई अनुभव नहीं था। मजे की बात है कि तोप के गोले के लिए कंपनी को तीन बार भुगतान किया गया, लेकिन उत्पादन में दिक्कतों के कारण आपूर्ति में हर बार देरी हुई। जब 2025 में गोला-बारूद मिला भी, तो गुणवत्ता निम्नस्तर की निकली।
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मामला वर्ष 2024 में एस्टोनिया के सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट्स और इटली में पंजीकृत डाटासेल एसआरएल के बीच हुए अनुबंधों से जुड़ा है। अगस्त 2024 में हुए पहले करार के तहत करीब 1.5 करोड़ यूरो अग्रिम दिए गए। इसके बाद दो और चरणों में कुल मिलाकर 7 करोड़ यूरो भुगतान हुआ। डाटासेल एसआरएल को उसी साल भारतीय कंपनी नेको डिफेंस म्यूनिशन्स ने खरीदा था। एजेंसी'
नागपुर की है कंपनी
एस्टोनिया मामले में जिस नेको डिफेंस म्यूनिशन्स प्रा.लि. का नाम आया है वह नागपुर के जायसवाल परिवार की कंपनी है। यह सितंबर 2023 में बनी। इसके निदेशक आनंद जायसवाल व सिद्धार्थ जायसवाल हैं। जायसवाल ग्रुप स्टील, कास्टिंग व इंजीनियरिंग कारोबार के लिए जाना जाता है। आनंद कंपनी के चेयरमैन अरविंद जयसवाल के बेटे हैं।
इस परिवार के सदस्य मनोज जायसवाल व रमेश जायसवाल यूपीए शासन में हुए कोयला घोटाले में लिप्त मिले थे। 2024 में सीबीआई की विशेष अदालत ने झारखंड में दोनों को गलत सूचना देने, फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर कोल ब्लॉक हथियाने का दोषी पाया था। इस फैसले को ऊपरी कोर्ट में चुनौती दी गई है।