दुबई से इस्राइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमानी सह-पायलट के हमले के बाद 174 यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई थी। इस बीच भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार घायल होने के बावजूद डटे रहे। उनके साथ प्लंबर यानिव हयून, बैंक सीईओ ज्विका मानेस, इंश्योरेंस एजेंसी मालिक असफ राजुआन और दंत चिकित्सक शोटा मुसायेव ने मोर्चा संभाला। आखिर किसने हमलावर को दबोचा, किसने विमान संभाला और किसने कैप्टन का इलाज किया?
जाको राखे साईंया, मार सके ना कोय... दुबई से इस्राइल जा रही उड़ान में बैठे 174 लोग इस कहावत की जीती-जागती मिसाल बन गए। एक विमान हजारों फीट की ऊंचाई पर आसमान में उड़ रहा था। सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक कॉकपिट में ऐसी घटना हुई कि विमान में बैठे यात्रियों की जान सांसत में आ गई। पायलट और सह-पायलट के बीच हुई चाकूबाजी के बाद हालात बिगड़ते चले गए और विमान के नीचे की ओर जाने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। भारतीय कैप्टन ने आखिरी दम तक अपनी जान की परवाह न करते हुए मोर्चा संभाले रखा।
दंत चिकित्सक ने घायल भारतीय कैप्टन को कैसे बचाया?
शोटा मुसायेव पेशे से दंत चिकित्सक हैं। उन्होंने भी पायलट को देखकर कॉकपिट की तरफ दौड़ लगाई। शुरुआत में उन्होंने हमलावर को काबू करने में मदद की। जब सह-पायलट को बांध दिया गया तो मुसायेव ने घायल भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की तरफ ध्यान दिया। उनके मुताबिक, कैप्टन के सिर और हाथों से काफी खून निकल रहा था। मुसायेव ने प्राथमिक उपचार देते हुए खून बहना रोकने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि वह विमान में मौजूद एकमात्र डॉक्टर थे।
उन्होंने बताया कि कैप्टन काफी देर तक होश में थे और उनसे बातचीत भी कर पा रहे थे। हालांकि, लैंडिंग के करीब उनकी हालत कुछ बिगड़ी। मुसायेव ने बताया कि हमलावर को कई बार बांधना पड़ा, क्योंकि वह लगातार खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था। आखिरकार यात्रियों ने उसके हाथ-पैर अच्छी तरह बांध दिए और उसे काबू में रखा। इसके बाद सऊदी अरब में विमान उतरने पर कैप्टन को मेडिकल टीम के पास पहुंचाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, स्मित मच्छार की सर्जरी हुई और उनकी हालत अब स्थिर है।
ऐसे मुश्किल हालातों के बीच किसने क्या किया? बिंदुवार तरीके से समझें...
इस पूरी घटना में बाकी लोगों की क्या भूमिका रही?
घटना के दौरान केवल इन चार यात्रियों ने ही मदद नहीं की। यात्रियों के मुताबिक, ताली मैंस ने कॉकपिट से आ रही आवाजें सुनीं और आसपास के लोगों का ध्यान इस तरफ खींचा। इसके बाद कई लोग कॉकपिट की तरफ पहुंचे। विमान में यात्रा कर रहे दो वैकल्पिक पायलटों ने भी बाद में कॉकपिट की कमान संभाली और विमान को सुरक्षित लैंडिंग तक पहुंचाया। इस पूरी घटना में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका भी बेहद अहम रही। उनके गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा यात्रियों के लिए पहुंच योग्य होना बाकी लोगों के अंदर जाने का रास्ता बना।
इसके बाद यात्रियों ने हमलावर को काबू किया और विमान के नियंत्रण में मदद की। इस्राइल के राष्ट्रपति ने कैप्टन स्मित मच्छार के साहस, दृढ़ता और उन कदमों के लिए आभार जताया, जिनसे कई लोगों की जान बचाने में मदद मिली। चार यात्रियों यानिव हयून, ज्विका मानेस, असफ राजुआन और डॉक्टर शोटा मुसायेव के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई। इस पूरी घटना में अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग जिम्मेदारी संभाली, लेकिन उनका साझा मकसद विमान में मौजूद लोगों की जान बचाना था।