अमेरिका में भारतीय मूल के लोग हिंदूफोबिया के नाम पर बढ़ती हिंसा और हिंदुओं के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर काफी चिंतित हैं। अमेरिका के नामी भारतवंशियों और अमेरिकी सांसदों ने देश में हिंदूफोबिया के खिलाफ आवाज उठाई है। वाशिंगटन में दूसरे नेशनल हिंदू एडवोकेसी डे के अवसर पर कार्यक्रम में अमेरिकी कांग्रेस के कम से कम 21 सदस्यों ने भाग लिया। निर्वाचित प्रतिनिधियों ने अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे भेदभाव पर ध्यान दिए जाने की जरूरत बताई।
इस दौरान निर्वाचित प्रतिनिधियों ने कहा कि अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ भेदभाव पर ध्यान देने की जरूरत है। कांग्रेसी रिच मैककॉर्मिक ने उत्तरी अमेरिका के हिंदुओं के संगठन (CoHNA) द्वारा यूएस कैपिटल में आयोजित सम्मेलन में कहा कि इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि कैसे, सिर्फ जाति के आधार पर ही नहीं बल्कि धर्म के आधार पर भी भेदभाव होता है और हिंदू समुदाय को हिंदूफोबिया के नाम पर डराना-धमकाना एक पुरानी समस्या है।
कांग्रेसी श्री थानेदार ने कहा कि मैं हर व्यक्ति के लिए धार्मिक स्वतंत्रता में दृढ़ता से विश्वास करता हूं और किसी भी तरह के हमलों और भय के खिलाफ खड़ा हूं। उन्होंने विविध समूहों के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और धर्म की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म एक शांतिपूर्ण धर्म है, फिर भी इस पर हमला किया गया है और इसे संरक्षित करने की आवश्यकता है। दूसरों की तरह, हिंदू भी किसी भी प्रकार की नफरत, पूर्वाग्रह या भय के बिना अपने धर्म का पालन करने के हकदार हैं।
सम्मेलन में भाग लेने वालों में 12 राज्यों के हिंदू अमेरिकियों में हैंक जॉनसन, टॉम कीन, रिच मैककॉर्मिक, थानेदार, बडी कार्टर और सैनफोर्ड बिशप के साथ-साथ ओहियो राज्य के सीनेटर नीरज अंतानी भी शामिल थे। वहीं नीरड अतानी ने कहा कि अमेरिका में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। वहीं हिंदू संगठन के अध्यक्ष निकुंज त्रिवेदी के अनुसार, अमेरिका में हिंदुओं के बारे में जागरूकता बढ़ रही है।
अमेरिका में हिंदुओं की संख्या
2015 में प्यू द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका में 20 लाख 23 हजार हिंदू हैं। बता दें अमेरिका में ईसाई, यहूदी और मुसलमानों के बाद हिंदुओं की सबसे बड़ी जनसंख्या है। प्यू डेटा के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में किसी भी धर्म के मुकाबले हिंदू धर्म को सबसे अधिक मान्यता है।