अमेरिका-भारत के रिश्ते आज जहां, कुछ दशक पहले कल्पना भी नहीं थी : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ वर्चुअल वार्ता के दौरान कहा, दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत और अमेरिका एक दूसरे के स्वाभाविक सहयोगी हैं और दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रिश्तों में जो विकास हुआ है, जो गति आई है उसकी कुछ दशक पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर बाइडन के नारे को याद करते हुए कहा, अपने कार्यकाल के आरंभ में आपने कहा था कि ‘लोकतंत्र से संभव’ है। इस नारे को अर्थपूर्ण बनाने के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी और रिश्तों का सफल होना सबसे बढ़िया तरीका है।
वहीं, बैठक की शुरुआत में बाइडन ने कहा, प्रधानमंत्री जी, दोनों देशों के संबंधों के और गहरा और मजबूत होने में हमारे बीच लगातार होने वाली बातचीत और विचार-विमर्श महत्वपूर्ण कारक है। इससे हमारे लोगों और विश्व का भला होगा। खासकर विश्व के आपके हिस्से में, जिसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। बाइडन ने कहा, हमारी साझेदारी की जड़ में हमारे लोगों का गहरा संपर्क, पारिवारिक दोस्ती और साझा मूल्य हैं। भारत और अमेरिका को दो जीवंत लोकतंत्र करार देते हुए बाइडन ने कहा, कोविड-19, स्वास्थ सुरक्षा और जलवायु संकट के कारण पैदा हुई वैश्विक चुनौतियों को लेकर हमारी साझा चिंताएं हैं। साथ ही भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रक्षा संबंध है।
रूस-यूक्रेन पर निर्णय लेने के लिए भारत स्वतंत्र
अमेरिका ने राष्ट्रपति जो बाइडन और पीएम मोदी के बीच सोमवार को हुए वर्चुअल बैठक में रूस को लेकर तेल आयात या अन्य किसी तरह की कोई विशेष मांग भारत के सामने नहीं रखी है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने यह दावा करते हुए यह भी कहा कि रूस से तेल आयात कर भारत ने किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और यूक्रेन से जुड़े विभिन्न मामलों में भारत अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों के शीर्ष नेताओं के बीच यह बैठक तब हुई जब रूस से तेल खरीद और यूक्रेन संकट को लेकर भारत के रुख के मामले में अमेरिका असहज रहा है। जेन साकी ने कहा, दोनों नेताओं के बीच रूस-यूक्रेन से जुड़े कई मामलों पर चर्चा हुई। यह बहुत सौहार्दपूर्ण बातचीत थी। मुझे लगता है कि हम सबने पीएम मोदी की टिप्पणियों को भी देखा। ये एकदम सीधी बातचीत थी। ईंधन का मुद्दा निश्चित रूप से विचार का विषय था।
राजनाथ को अमेरिकी रक्षामंत्री ने चीन के खिलाफ सहयोग का भरोसा दिलाया
अमेरिकी रक्षामंत्री ऑस्टिन लॉयड ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को एलओसी पर चीनी आक्रामकता के खिलाफ भारत को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया। रक्षा और विदेशमंत्री स्तर की टू प्लस टू वार्ता में दोनों नेताओं ने सैन्य सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। विदेशमंत्री जयशंकर और अमेरिका के विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन के बीच भी वार्ता हुई।
चार चरणों में हो रहीं इन वार्ताओं को दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में काफी अहमियत दी जा रही है। बाइडन सरकार बनने के बाद पहली बार उनकी कैबिनेट के किसी वरिष्ठ सहयोगी ने भारतीय सीमा में चीन के अतिक्रमण का मुद्दा उठाया और चीन की तरफ से बनाई जा रहीं ढांचागत सुविधाओं का जिक्र किया।
ऑस्टिन ने वार्ता के बाद कहा कि हमने आज महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं की हैं जो अंतरिक्ष और साइबर स्पेस सहित टेक्नोलॉजी इनोवेशन और सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारे बीच आज एक द्विपक्षीय 'स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस' एग्रीमेंट संपन्न हुआ है।
यह अंतरिक्ष में अधिक जानकारी साझा करने और सहयोग में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि हम इस वर्ष के अंत में प्रशिक्षण और अभ्यास के माध्यम से साइबर स्पेस में भी अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिका ने कहा, भारत के साथ मिलकर काम करते रहेंगे
चीन की बढ़ती आक्रामकता को लेकर अमेरिका की यह बात बेहद मायने रखती है। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए उठाए जाने वाले उपायों पर भी विचार विमर्श किया। अमेरिका ने यह भी कहा कि वह चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ काम करता रहेगा।
पिछले साल भी हो चुकी है ऐसी वार्ता
ऐसी पिछली वार्ता 2021 के सितंबर में हुई थी। इस बार की वार्ता रूस और यूक्रेन के बीच बढ़े हुए तनाव के बीच हो रही है और यह भी एक संयोग है कि सोमवार को ही यूक्रेन मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक भी हुई है।
जेन साकी ने रखा अमेरिकी पक्ष
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि हम यहां उन्हें तेल आयात करने के अपने साधनों में विविधता लाने में मदद करने के लिए हैं। अमेरिका से आयात पहले से ही महत्वपूर्ण है, जो रूस से कहीं अधिक है। राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से रूस से और अधिक तेल आयात नहीं बढ़ाने पर विचार करने को लेकर यह बात कही। राष्ट्रपति ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा कि इसे बढ़ाना हितकर नहीं है।
जेन साकी ने बताया कि तेल आयात पर राष्ट्रपति बाइडन ने कहा है कि मैं चाहूंगा कि पीएम मोदी और अन्य भारतीय नेता इस पर अपना पक्ष रखें। इस समय यह केवल 1-2 प्रतिशत है, हम संयुक्त राज्य अमेरिका से 10 प्रतिशत निर्यात करते हैं। यह किसी भी प्रतिबंध या उस तरह की किसी भी चीज का उल्लंघन नहीं है।
भारत ने बुचा में हिंसा की निंदा की। उन्होंने एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन किया, यूक्रेन और उसके पड़ोसी को 90 टन से अधिक मानवीय राहत सामग्री प्रदान की, 18 देशों के लगभग 150 विदेशी नागरिकों को निकालने के लिए अपने संसाधनों का इस्तेमाल किया।
पाकिस्तान को लेकर कही यह बात
उन्होंने कहा कि हम संवैधानिक लोकतांत्रिक सिद्धांतों के शांतिपूर्ण समर्थन का स्वागत करते हैं, एक राजनीतिक दल का दूसरे के सापेक्ष समर्थन नहीं करते हैं। हम निश्चित रूप से कानून के शासन और कानून के तहत समान न्याय के सिद्धांतों का समर्थन करते हैं। हम पाकिस्तान के साथ भी अपने दीर्घकालिक सहयोग को महत्व देते हैं।
एक समृद्ध और लोकतांत्रिक पाकिस्तान अमेरिकी हितों के लिए महत्वपूर्ण है, जो इस बात की परवाह किए बिना कि भविष्य में नीति निर्धारण के मामले में नेता कोई भी हो, जाहिर है, हम कई स्तरों पर उनके साथ निकट संपर्क में रहते हैं।
व्हाइट हाउस ने जारी किया बयान
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत एक अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण भागीदार है। हम कई मुद्दों पर भारत के साथ बहुत निकटता से परामर्श करते हैं। यह यूक्रेन के खिलाफ रूस के अकारण और अनुचित युद्ध के परिणामों पर चर्चा करने का भी एक अवसर था।
राष्ट्रपति बाइडन ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी के साथ चौथे यूएस-इंडिया 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद का उद्घाटन करने के दौरान यह बात कही। साथ में, उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और सैन्य सहयोग और विस्तारित आर्थिक और लोगों से लोगों के संबंधों पर सहयोग के माध्यम से अमेरिका-भारत संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता जताई।
बयान में यह भी कहा गया है कि भारत-अमेरिका ने कोविड-19 महामारी को समाप्त करने, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने, वैश्विक खाद्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने और एक स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रूप से सहयोग जारी रखने के लिए भी प्रतिबद्धता दिखाने पर चर्चा की।
उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों के नेताओं के रूप में हिंद-प्रशांत और उससे आगे के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर विशेष ध्यान देने के साथ यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध के अस्थिर प्रभावों पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति बाइडन और प्रधानमंत्री मोदी क्वाड शिखर सम्मेलन के लिए टोक्यो में व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए उत्सुक थे।
हमारे द्विपक्षीय संबंधों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई : ब्लिंकन
अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता में कहा कि इन 2+2 बैठकों ने पहले ही हमारे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.. आज की चर्चाएं पिछली बैठकों पर आधारित थीं, जो हमने की हैं। यह वैश्विक मामलों में एक महत्वपूर्ण क्षण है।
ब्लिंकन ने कहा कि आज, हमने प्रमुख मुद्दों, साझा वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की- जिसमें यूक्रेन के खिलाफ रूस का युद्ध, कोविड-19 महामारी को समाप्त करना, जलवायु संकट, एक स्वतंत्र, खुले लोकतांत्रिक, सुरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखना शामिल है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे पास स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने का अवसर, हमारी बढ़ती प्रौद्योगिकी साझेदारी का प्रदर्शन, जिसमें हमारा मानना है कि दोनों देशों और दुनिया में लोगों के लाभ के लिए खोज, उपलब्धि के लिए लगभग असीम क्षमता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे पुराने लोकतंत्र के रूप में, हम अपने लोगों को अवसर, सुरक्षा, स्वतंत्रता और गरिमा प्रदान करने के लिए हर दिन एक साथ काम करते हैं।
हमारे वैज्ञानिक और संस्थान मिलकर सुरक्षित और प्रभावी कोविड वैक्सीन विकसित कर रहे हैं। हम ऑस्ट्रेलिया और जापान में अपने सहयोगियों के साथ क्वाड वैक्सीन साझेदारी के माध्यम से वैक्सीन को पूरे हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका जो करेंगे, उससे फर्क पड़ेगा : जयशंकर
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि चौथे भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय संवाद में भाग लेकर बहुत खुशी हो रही है। आज सुबह हमने अपने राज्य और रक्षा समकक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। विदेश मंत्री ने कहा कि वर्चुअल समिट के जरिए पीएम मोदी और राष्ट्रपति बाइडन द्वारा दिए गए मार्गदर्शन से हमें फायदा हुआ है। 2+2 प्रारूप का उद्देश्य हमारी साझेदारी के लिए अधिक एकीकृत दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। यह तेजी से प्रासंगिक हो गया है क्योंकि हमारे जुड़ाव का दायरा और तीव्रता लगातार बढ़ रही है।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि हमारे अवसरों और चुनौतियों की प्रकृति ऐसी है कि उन्हें क्रॉस-कटिंग संवाद के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से संबोधित किया जाता है। जब हम चौथी बार मिल रहे हैं, तो हमने जो प्रगति की है, उस पर हम संतोष कर सकते हैं।
भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि बढ़ती नजदीकियों को मापने के मानदंड अपनी कहानी बताते हैं चाहे वह हमारा 160 बिलियन डॉलर का व्यापार खाता हो, हमारे 200,000 छात्र हों, हमारे उच्चतम दर्ज निवेश स्तर हों, या हमारा तेजी से बढ़ता ऊर्जा व्यापार।
उन्होंने कहा कि हमारा सहयोग अपने द्विपक्षीय दायरे से काफी आगे बढ़ गया है और वैश्विक मुद्दों पर इसका स्पष्ट प्रभाव है; यह कोविड19 की चुनौती का सामना करना, जलवायु परिवर्तन को लेकर कदम उठाना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना या महत्वपूर्ण तकनीकों को बढ़ावा देना हो सकता है। भारत और अमेरिका मिलकर जो करेंगे, उससे फर्क पड़ेगा।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि इसे हमने देखा है, विशेष रूप से क्वाड ने पिछले वर्ष में जो ऊंचाई और तीव्रता प्रदर्शित की है। इस संबंध में हमारी उपलब्धियों में व्यापक प्रतिध्वनि है। आज, हमने इन सभी मामलों और अन्य की समीक्षा की।
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक कैसे सुनिश्चित किया जाए, यह भी आज हमारे एजेंडे में था। हमने अफगानिस्तान में और उसके आस-पास की घटनाओं के बारे में बात की। हमारी बातचीत में भारतीय उपमहाद्वीप में हाल की घटनाओं को भी शामिल किया गया।
अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड जेम्स ऑस्टिन ने कही यह बात
अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड जेम्स ऑस्टिन ने वार्ता से पहले कहा था कि हमें अपने पहले रक्षा ढांचे पर हस्ताक्षर किए लगभग दो दशक हो चुके हैं और हमने एक ऐसी साझेदारी का निर्माण किया है जो अब इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा की आधारशिला है। आज हम अमेरिका और भारतीय सेनाओं को एक साथ मिलकर संचालन और समन्वय के लिए तैनात कर रहे हैं।
अब, पहले से कहीं अधिक, हमारे द्वारा साझा किए जाने वाले मूल्यों की रक्षा के लिए लोकतंत्रों को एक साथ खड़ा होना चाहिए। हम सभी इंडो-पैसिफिक में हमारे सामने आने वाली चुनौतियों को समझते हैं। चीन अपने अधिनायकवादी हितों को बढ़ाने वाले तरीकों से क्षेत्र और आंतरिक प्रणाली को और अधिक व्यापक रूप से नया रूप देना चाहता है।
ऑस्टिन ने कहा कि लेकिन जैसा कि हम अपने रक्षा समझौतों को क्रियान्वित करते हैं और अपने सहयोग को अगले स्तर तक ले जाते हैं, मेरा मानना है कि हम इस क्षेत्र में शक्ति के अनुकूल संतुलन को बनाए रख सकते हैं और मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं द्विपक्षीय रक्षा प्राथमिकताओं की एक श्रृंखला पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हूं, जिसमें गहन जानकारी साझा करना और औद्योगिक सहयोग शामिल है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि हमारी सेनाएं किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ ने कही यह बात
भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रमुख रक्षा साझेदारी भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। एक्ट ईस्ट और नेबरहुड फर्स्ट नीतियों का पालन करते हुए हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक इंडो-पैसिफिक में भारत की महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं। हमारी भागीदारी का एक महत्वपूर्ण फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र से संबंधित है।
उन्होंने कहा कि भारत ने इस क्षेत्र में 2004 में सुनामी और कोविड के दौरान प्रमुख भूमिका निभाई। हमने पिछले कुछ वर्षों में अपने देशों के बीच 8 अलग-अलग रक्षा-संबंधी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें अवर्गीकृत डोमेन के लिए स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस एग्रीमेंट भी शामिल है, जिस पर आज हस्ताक्षर किए जा रहे हैं।
भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महामारी के बावजूद, भारत-अमेरिका सैन्य जुड़ाव संचार में उच्च क्षमता, निकट जानकारी साझा करने और आपसी रसद समर्थन में वृद्धि हुई है। यह हमारी रक्षा साझेदारी की बढ़ती गहराई और पैमाने का प्रतिबिंब है। एक दशक में, अमेरिका से हमारी रक्षा आपूर्ति नगण्य से बढ़कर 20 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक हो गई है। हम भारत में निवेश करने वाली अमेरिकी कंपनियों और मेक इन इंडिया कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए तत्पर हैं।
भारत-अमेरिका 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी साझेदारी इंडो पैसिफिक और इंडियन ओशन रीजन में शांति, स्थिरता और विकास के लिए काफी महत्वपूर्ण है। बैठक के दौरान हमने अपने पड़ोस और इंडियन ओशन रीजन के हमारे आकलन को भी साझा किया है। भारत का डिपार्टमेंट और स्पेस और यूएसए का डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के बीच 'स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस एग्रीमेंट' भी संपन्न हुआ है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय मेंडिफेंस स्पेस और डिफेंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डायलॉग के बारे में एग्रीमेंट, कई अन्य पहल और एग्रीमेंट जो चर्चा के चरण में हैं, उनमें सार्थक प्रगति हमारी सैन्य सहभागिता के दायरा को और बढ़ाने को लेकर हुई है। मैंने अमेरिका की कंपनियों को डिफेंस, एयरोस्पेस और मेक फॉर इंडिया एंड वर्ल्ड प्रोग्राम के लिए भी आमंत्रित किया है। हम COMCASA (संचार संगतता और सुरक्षा समझौता) के कार्यान्वयन और BECA (बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौते) के प्रभावी संचालन में भी प्रगतिशील हैं।
हम अमेरिकी कंपनियों के साथ सह-विकास और सह-उत्पादन की इच्छा व्यक्त करते हैं और अमेरिका की डिफेंस कंपनियों से यूपी और तमिलनाडु के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में और निवेश करने का अनुरोध किया है।