वॉशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में आयोजित न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस में भारत और अमेरिका के संबंधों पर गहन चर्चा हुई। जहां विशेषज्ञों ने माना कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में विश्वास की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसके साथ ही दोनों देश एक दूसरे की मजबूरियां नहीं समझ पा रहें।
अमेरिका के हडसन इंस्टीट्यूट में आयोजित न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस में भारत और अमेरिका के संबंधों पर बड़ी चर्चा हुई। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी भरोसे की कमी अब सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आई है, हालांकि सहयोग अभी भी जारी है। इसी क्रम में पैनल चर्चा में मौजूद वक्ता राम माधव ने कहा कि पहले भारत और अमेरिका के रिश्ते ज्यादा मजबूत और तालमेल वाले थे, लेकिन अब दोनों देशों के बीच भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि इस भरोसे को फिर से बनाने की जरूरत है। पैनल ने कहा कि यह रिश्ता भले ही मजबूत है, लेकिन एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है, जिसमें उम्मीदों का मेल न खाना, नीतियों में अनिश्चितता और काम की धीमी गति जैसी दिक्कतें हैं।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप गलियारा के फिर से सक्रिय होने की जरूरत
हालांकि, दूसरी ओर विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और खासकर आर्थिक क्षेत्र में सहयोग के कई मौके अभी भी मौजूद हैं। ऐसे में राम माधव ने बताया कि भारत टैरिफ और ऊर्जा आयात जैसे मुद्दों पर लचीलापन दिखा रहा है और एक संभावित व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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पिछले 20 साल में भारत-अमेरिका रिश्ता
गौरतलब है कि पिछले 20 वर्षों में भारत-अमेरिका साझेदारी रक्षा, व्यापार और तकनीक जैसे क्षेत्रों में काफी आगे बढ़ी है, लेकिन हाल के वैश्विक बदलावों और नीतिगत मतभेदों ने कुछ कमजोरियों को उजागर किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-अमेरिका संबंध अभी मजबूत हैं, लेकिन भविष्य में इन्हें और बेहतर बनाने के लिए आपसी भरोसा फिर से कायम करना सबसे जरूरी होगा।