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US-India: अमेरिकी राजकोष सचिव बोले- भारत-अमेरिका रिश्ते जटिल, अंत में दोनों देश आएंगे साथ

Wed, 27 Aug 2025 08:34 PM IST
राहुल कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

India-US tariff issue: अमेरिकी राजकोष सचिव (ट्रेजरी सेक्रेटरी) स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को भारत-अमेरिका संबंधों को बहुत जटिल बताते हुए आशा जताई कि "आखिरकार हम एक साथ आएंगे।
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भारत अमेरिका व्यापार समझौता (प्रतीकात्मक) - फोटो : एडॉब स्टॉक
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विस्तार
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टैरिफ को लेकर जारी तनाव के बीच अमेरिका के राजकोष सचिव (ट्रेजरी सेक्रेटरी) स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते काफी जटिल हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे रिश्ते हैं और अंत में दोनों देश साथ आएंगे। बेसेंट का यह बयान ऐसे समय आया, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर अतिरिक्त 25% टैरिफ लागू कर दिया। जिसके बाद भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लग चुका है।

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'मोदी-ट्रंप के बीच अच्छे संबंध'
एक साक्षात्कार के दौरान बेसेंट ने कहा, यह बहुत जटिल रिश्ता है। राष्ट्रपति (डोनाल्ड) ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत स्तर पर अच्छे संबंध हैं और यह सिर्फ रूसी तेल के मुद्दे तक सीमित नहीं है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। मुझे भरोसा है कि आखिर में हम एक साथ आएंगे। मुझे उम्मीद थी कि भारत के साथ व्यापार समझौता अमेरिका का शुरुआती समझौता होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भारत ने बहुत पहले ही बातचीत शुरू कर दी थी, लेकिन अब तक डील नहीं हो पाई। मुझे लगा था मई-जून तक समझौता हो जाएगा। 

बेसेंट ने कहा कि उन्हें लगा था कि भारत के साथ व्यापार समझौता अमेरिका की शुरुआती डील्स में से एक होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि भारत ने "लिबरेशन डे" (2 अप्रैल 2025) के तुरंत बाद टैरिफ वार्ता शुरू की थी, जब ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर व्यापक शुल्क लगाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा, "मुझे लगा था मई-जून तक भारत के साथ समझौता हो जाएगा। लेकिन वार्ता खिंचती रही और फिर रूसी कच्चे तेल की खरीद का पहलू भी सामने आ गया, जिससे मामला और जटिल हो गया। 
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रुपये को लेकर कही ये बड़ी बात
बेसेंट ने दोहराया, मुझे विश्वास है कि अंत में हम साथ आएंगे। उन्होंने कहा कि व्यापार घाटे की स्थिति में अमेरिका के पास बढ़त है। भारत हमें सामान बेच रहा है। उनके टैरिफ बहुत ऊंचे हैं और हमारे साथ उनका बड़ा सरप्लस है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत ब्रिक्स देशों के साथ रुपये में व्यापार कर डॉलर से अलग हो सकता है? इस पर बेसेंट ने कहा, "मेरे पास चिंता करने के लिए बहुत सी बातें हैं, लेकिन रुपया रिजर्व करेंसी बने, यह उनमें से नहीं है। रुपया अभी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर के करीब है। 

ये भी पढ़ें: US Tariff: 'भारत-अमेरिका टैरिफ मामले को सुलझाने के प्रयास जारी', सूत्रों का दावा- बातचीत के रास्ते खुले
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उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को अपने यूरोपीय सहयोगियों से अधिक सहयोग की आवश्यकता है। यूरोपियन देश भारतीयों पर टैरिफ का दबाव नहीं बना रहे, बल्कि वे वही परिष्कृत तेल उत्पाद खरीद रहे हैं जो रूसी कच्चे तेल से बन रहे हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वह भारतीय किसानों, पशुपालकों, लघु उद्योगों के हितों से समझौता नहीं कर सकते। हम पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन हम इसे सहन करेंगे।

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