अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के चुनावों में मैदान में उतरे 38 साल के भारतीय-अमेरिकी सुहास सुब्रमण्यम ने वादा किया है कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो वैध आव्रजन और छोटे व्यवसायों की मदद कर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही बड़े पैमाने पर आव्रजन सुधार पर काम करेंगे। मौजूदा वक्त में वह वर्जीनिया राज्य के सीनेटर हैं और वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल जिले से निचले सदन के लिए डेमोक्रेटिक टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
सुब्रमण्यम का कहते हैं कि वह यह पक्का करना चाहते हैं कि व्यवसाय बढ़ें और उनके पास जीवन की उच्च लागत और बढ़ती लागतों को पूरा करने की योजना हो। उन्होंने आगे कहा, मैं वॉशिंगटन,डीसी, डलास एयरपोर्ट क्षेत्र के ठीक बाहर के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस का चुनाव लड़ रहा हूं। हमें पूरा विश्वास है हर कोई बाहर आए और वोट करे तो मैं पूरे पूर्वी तट और अमेरिका के दक्षिण से कांग्रेस के लिए चुना जाने वाला पहला भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार होऊंगा। हमारे पास अभी कांग्रेस में पांच हैं और मैं छठा होऊंगा और मुझे लगता है कि वहां एक सीट और होने का मतलब हमारे समुदाय के लिए अच्छी चीजें होंगी। यूएस में नवंबर होने जा रहे आम चुनावों में उनके जीतने की सबसे अधिक संभावना है। अगर वह चुनाव जीतते जाते हैं,तो वह कांग्रेस के समोसा कॉकस में शामिल हो जाएंगे। इसमें वर्तमान में पांच भारतीय अमेरिकी अमी बेरा, राजा कृष्णमूर्ति,रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और श्री थानेदार शामिल हैं।
भारत यूएस के आर्थिक भविष्य का बड़ा हिस्सा
सुब्रमण्यम ने कहा कि वह आव्रजन के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने कहा कि हमें वैध आव्रजन पर भी विचार करना होगा। यहां एच1बी वीजा वाले ग्रीन कार्ड पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें 10-15 साल तक इंतजार करना पड़ता है। हमारे पास बहुत पुरानी प्रणाली है। मैं चाहता हूं कि हम इस पर ध्यान दें क्योंकि मुझे लगता है कि भारत जैसे कुछ देश हैं, जिनमें इतनी प्रतिभा है कि वे हमारे आर्थिक भविष्य का एक बड़ा हिस्सा बन सकते हैं और अमेरिका में बहुत योगदान दे सकते हैं। मैं उन्हें वर्जीनिया में अपने पड़ोस में रहते हुए देखता हूं। उनके संघर्षों को देखता हूं और यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि हम इसका सार्थक तरीके समाधान करें।
भारतीय होने पर गर्व
सुब्रमण्यम ने कहा कि मेरे माता-पिता 70 के दशक के अंत में डलेस हवाई अड्डे से अमेरिका आए थे। उन्होंने एक अच्छा जीवन जीने के लिए यहां आने का फैसला लिया था। उन्होंने मुझे कुछ मूल्य सिखाए, शिक्षा की अहमियत के बारे में बताया। मुझे अपनी भारतीय जड़ों से जुड़ा रखना सिखाया। मेरे लिए उस विरासत को जारी रखना बहुत अहम है। मेरे पास बहुत सारी योजनाए हैं जो मैं पूरी करना चाहता हूं, लेकिन अपनी पृष्ठभूमि,अपनी विरासत पर गर्व करते हुए इन पर आगे बढ़ना चाहता हूं।