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UNSC: 'स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाने वालों की तय हो जवाबदेही', सुरक्षा परिषद में भारत ने दी सलाह

Fri, 26 Jun 2026 07:35 AM IST
अमन तिवारी पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र

सार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में बच्चों और स्कूलों पर हमले करने वालों की जवाबदेही तय करने की मांग की। भारत ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक प्राथमिकता है तथा दोषियों को सजा दिए बिना यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता।
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UNSC में बच्चों की सुरक्षा पर भारत की मांग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बड़ी मांग रखी है। भारत ने कहा कि जो लोग स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाते हैं, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। भारत ने जोर देकर कहा कि बिना सजा के बच्चों की सुरक्षा का काम अधूरा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पार्वथनेनी ने सुरक्षा परिषद में यह बात कही। उन्होंने 'सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित बच्चों की शिक्षा की सुरक्षा' विषय पर अपनी बात रखी।
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राजदूत ने कहा कि शिक्षा एक ऐसा अधिकार है जो युद्ध के समय भी मिलना चाहिए। यह शांति स्थापित करने का सबसे ताकतवर जरिया है। भारत युद्ध के दौरान बच्चों की सुरक्षा और उनके पढ़ने-लिखने के अधिकार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत चाहता है कि हर बच्चा अपनी पूरी क्षमता को पहचान सके।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की 2025 की रिपोर्ट बहुत चिंताजनक है। इस रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध वाले इलाकों में बच्चों के खिलाफ हिंसा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। साल 2025 में बच्चों के खिलाफ 38,558 गंभीर अपराध दर्ज हुए। इनसे 24,174 बच्चे प्रभावित हुए। इनमें 15,493 लड़के और 7,990 लड़कियां शामिल हैं। करीब 691 बच्चों की पहचान नहीं हो सकी। यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। कई बच्चों के साथ तो एक से ज्यादा बार गंभीर अपराध हुए।
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रिपोर्ट में बताया गया कि युद्ध में शामिल गुटों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन नहीं किया। वे बिना किसी डर के अपराध करते रहे। इसका बुरा असर आम लोगों और बच्चों पर पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सेनाएं भी बच्चों की हत्या और स्कूलों पर हमलों के लिए जिम्मेदार पाई गईं। उन्होंने मानवीय मदद को भी रोकने का काम किया।

भारत ने कहा कि बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर सेक्रेटरी-जनरल की 2025 की सालाना रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसमें बताया गया है कि एक ही साल में स्कूलों पर हमलों में 44 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है। दुनिया में हर छह में से एक बच्चा यानी करीब 47.3 करोड़ बच्चे युद्ध वाले इलाकों में रहते हैं। इनमें से 8.5 करोड़ से ज्यादा बच्चों के पास शिक्षा की कोई सुविधा नहीं है। भारत ने इसे पूरी मानवता की विफलता बताया है।

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राजदूत ने कहा कि बच्चों की शिक्षा बचाना असल में किसी देश का भविष्य बचाना है। इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी सरकारों की है। भारत में 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार मिला हुआ है। भारत ने 'दीक्षा' (DIKSHA) नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाया है। यह तकनीक और एआई (AI) की मदद से कई भाषाओं में बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहा है।
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भारत का अनुभव कहता है कि डिजिटल पढ़ाई युद्ध के समय बच्चों के लिए एक पुल का काम कर सकती है। भारत ने अपने पड़ोसी देशों में शरणार्थियों की शिक्षा के लिए काफी निवेश किया है। भारत का मानना है कि पढ़ाई जारी रखना ही मुश्किलों से उबरने का सबसे अच्छा तरीका है। भारत दूसरे देशों में स्कूल और ट्रेनिंग सेंटर बनाने में भी मदद कर रहा है।
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