भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान से लौटने वाले लोगों की स्थिति और आतंकवादी संगठनों के सुरक्षित ठिकानों का मुद्दा उठाया। राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने 30 लाख से अधिक लोगों की जबरन और असुरक्षित वापसी पर चिंता जताते हुए स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी की बात कही। उन्होंने अलकायदा के नेटवर्क, 9/11 और लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मोहम्मद का भी जिक्र किया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अफगानिस्तान पर तिमाही बैठक में भारत ने अफगान लौटने वालों की मानवीय स्थिति पर चिंता जताई। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतानेनी हरीश ने कहा कि 30 लाख से अधिक लोगों की ऐसी जबरन वापसी गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में बड़े स्तर पर मानवीय मदद और लोगों के बेहतर पुनर्वास के प्रयास होने चाहिए।
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भारत ने वापसी को लेकर क्या रुख रखा?
भारत ने कहा कि अफगान लोगों की वापसी स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक होनी चाहिए। हरीश ने कहा कि वापस लौटने वालों के पुनर्वास और समाज में दोबारा शामिल होने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह की प्रतिक्रिया ऐसी स्थिति में अपेक्षित थी, वह नहीं दिखना मौजूदा समय की चिंताजनक तस्वीर है।
भारत ने अलकायदा और 9/11 का मुद्दा क्यों उठाया?
राजदूत पर्वतानेनी हरीश ने कहा कि अलकायदा ने अफगानिस्तान से बाहर भी अपने सहयोगी संगठनों के जरिए आतंक का नेटवर्क फैलाया। उन्होंने 9/11 हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन हमलों की योजना बनाने और उन्हें निर्देशित करने वाले अलकायदा नेताओं को किसी दूर-दराज के, बिना शासन वाले इलाके में छिपे लोग समझना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक इन लोगों ने लंबे समय तक अपनी पहचान और गतिविधियों को छिपाए रखा था।
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हरीश ने कहा कि ऐसे माहौल को खत्म करना जरूरी है, जिसने आतंकवादी संगठनों को पनपने और अपनी गतिविधियां चलाने का अवसर दिया। हरीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे सुरक्षित ठिकानों की निरंतरता से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
भारत ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को लेकर क्या कहा?
भारत ने कहा कि 9/11 के साजिशकर्ताओं को जिस माहौल में काम करने का अवसर मिला था, उसी तरह का वातावरण बाद के वर्षों में अलका यदा से जुड़े संगठनों के लिए भी जगह और समर्थन देता रहा है। हरीश ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का नाम लेते हुए कहा कि ऐसे संगठन अलग-अलग पहचान अपनाकर सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध व्यवस्था से बचने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनके नेतृत्व और आतंकवादी प्रशिक्षण ढांचे को कार्रवाई से बचाया गया है।