भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने एक अहम समझौता किया है, जिससे प्रवासी भारतीय अपने पूर्वजों की जड़ों को आसानी से खोज सकेंगे। विदेशी मंत्री एस जयशंकर ने गिरमिटिया समुदाय की विरासत और संघर्ष को याद करते हुए उनके योगदान की सराहना की। पढ़िए रिपोर्ट-
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच एक अभिलेखीय सहयोग समझौता हुआ है। उन्होंने बताया कि यह समझौता प्रवासी भारतीयों को अपने पूर्वजों की जड़ों को खोजने और अपने परिवारों से दोबार जुड़ने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार गिरमिटिया समुदाय की विरासत को संरक्षित करने के प्रयास कर रही है।
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गिरमिटिया उन भारतीय श्रमिकों को कहा जाता है, जिन्हें 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश शासन फिजी, दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस और कैरिबियाई देशों में ले गया था। जयशंकर ने सोमवार को ऐतिहासिक नेल्शन द्वीप पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया।
गिरमिटिया कौन हैं?
गिरमिटिया उन भारतीय श्रमिकों को कहा जाता है, जिन्हें 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश शासन फिजी, दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस और कैरिबियाई देशों में ले गया था। जयशंकर ने सोमवार को ऐतिहासिक नेल्शन द्वीप पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि त्रिनिदाद और टोबैगो में पहले भारतीय गिरमिटिया मजदूरों को आए हुए 180 साल पूरे हो गए हैं। उन्होंने गिरमिटिया श्रमिकों के साहस और संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि कि उनकी मेहनत को हमेशा याद रखना चाहिए।
'अध्ययन केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही भारत सरकार'
उन्होंने कहा कि ये प्रवासी अपने साथ अपनी परंपराएं, आस्था और जीवन शैली लेकर आए थे और यह जरूरी है कि इस इतिहास को एक धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाए। जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गिरमिटिया समुदाय का एक विस्तृत डाटाबेस बनाने और उसकी विरासत पर शोध को बहुत अहमियत देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार पीएम मोदी के निर्देश पर एक विशेष गिरमिटिया अध्ययन केंद्र स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
'अपने पूर्वजों की जड़ें खोजने में मिलेगी मदद'
भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के बीच हुए समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता कैरिबियाई देश के कई लोगों को अपने पूर्वजों की जड़ों को खोजने और भारत में अपने परिवारों से जुड़ने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि त्रिनिदाद एवं टोबैगो में भारतीय उच्चायोग को ओसीआई के लिए बड़ी संख्या में आवेदन मिल रहे हैं, क्योंकि पीएम मोदी की यात्रा के दौरान ओसीआई पात्रता को छठी पीढ़ी तक बढ़ाया गया था। उन्होंने कहा, उच्चायोग को मिलने वाले ओसीआई आवेदनों की संख्या बढ़ रही है और हमारा प्रयास रहेगा कि उन लोगों की भी मदद की जाए जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं।