जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में चीन और श्रीलंका के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों पर मतदान से भारत गैरहाजिर रहा। चीन के शिनजियांग क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघन पर बहस के लिए कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों द्वारा यह प्रस्ताव पेश किया गया।
शिनजियांग में दस लाख से अधिक उइगरों को शिविरों में हिरासत में रखा गया है। प्रस्ताव पर 47 सदस्यीय परिषद में 17 सदस्यों ने पक्ष में मतदान किया। चीन सहित 19 ने विपक्ष में वोटिंग की। भारत, यूक्रेन ब्राजील व मेक्सिको समेत 11 सदस्य मतदान से अलग रहे।
यूएनएचआरसी में श्रीलंका के खिलाफ भी अल्पसंख्यक तमिलों पर अत्याचारों के विरोध में लाए गए प्रस्ताव पर मतदान में भी भारत ने हिस्सा नहीं लिया। परिषद के 47 सदस्यों में से 20 ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। वहीं विरोध में सिर्फ 7 वोट ही पड़े, जिनमें पाकिस्तान और चीन शामिल थे। प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने वाले 20 देशों में ब्रिटेन, अमेरिका, अर्जेंटीना, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, मेक्सिको, नीदरलैंड, पराग्वे, पोलैंड, कोरिया गणराज्य और यूक्रेन हैं।
भारतीय राजदूत इंद्रमणि पांडेय ने कहा, भारत ने 2009 के बाद श्रीलंका में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण प्रक्रिया में योगदान दिया है। श्रीलंका को सहायता प्रदान की है। राजदूत ने कहा भारत तमिलों के लिए समानता, न्याय, गरिमा और शांति की स्थितियां बनाने का पक्षधर है।