भारत सरकार ने संजय भंडारी के प्रत्यर्पण मामले में लंदन हाईकोर्ट से अपील दायर करने की अनुमति मांगी है, ताकि उसे कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करने के लिए भारत लाया जा सके। हाईकोर्ट ने मानवाधिकार का हवाला देते हुए भंडारी की प्रत्यर्पण प्रक्रिया को रद्द कर दिया था।
भारत सरकार ने लंदन हाईकोर्ट से संजय भंडारी के प्रत्यर्पण मामले में अपील दायर करने की अनुमति मांगी है। रक्षा क्षेत्र के सलाहकार भंडारी को नई दिल्ली लाने की कोशिश की जा रही है, ताकि कर चोरी और धनशोधन के मामले में मुकदमे का सामना कर सके।
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मामले से करीब से जुड़े सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में यह पहला कदम इस हफ्ते उठाया गया है। भारत सरकार ने लंदन हाईकोर्ट में अपील दायर करते हुए मांग करते हुए कहा है कि इस मामले में जो मुद्दे हैं, वे केवल कानूनी नहीं, बल्कि सार्वजनिक महत्व के हैं। अगर हाईकोर्ट इस अपील को स्वीकार करती है तो यह मामला ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है और वहां उस पर सुनवाई हो सकती है।
ब्रिटेन की कोर्ट के एक अधिकारी ने भी पु्ष्टि की कि भारत सरकार ने सार्वजनिक महत्व के दो कानूनी बिंदुओं की पुष्टि करने और सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की अनुमति हासिल करने के लिए आवेदन किया है।
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लंदन हाईकोर्ट के जज जस्टिस टिमोथी होलरोयड और जस्टिस कैरन स्टेन ने 28 फरवरी को संजय भंडारी के प्रत्यर्पण के आदेश को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने मानवाधिकार के आधार पर यह फैसला दिया था। ब्रिटेन की तत्कालीन गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने नवंबर 2022 में संजय भंडारी को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश जारी किया था। वेस्ट मिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस आदेश को मंजूरी दी थी। लेकिन हाईकोर्ट ने मानवाधिकार के आधार पर इसे रद्द कर दिया था।
कोर्ट ने कहा था, अगर संजय भंडारी को तिहाड़ जेल भेजा गया, तो उन्हें वहां के अन्य कैदी और जेल अधिकारी परेशान कर सकते हैं या उनके साथ मारपीट कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि भंडारी की प्रत्यर्पण प्रक्रिया यूरोपीय मानवाधिकार समझौते के अनुच्छेद तीन के खिलाफ है, जो उन्हें शारीरिक उत्पीड़न से बचाता है। इसके अलावा अदालत ने यह भी माना था कि भंडारी को निष्पक्ष और सही तरीके से न्याय पाने का अधिकार है, जैसा कि अनुच्छेद 6 में बताया गया है।