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चिंता: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा- महामारी में स्कूल बंद होने से बच्चों को भर्ती कर रहे आतंकी संगठन

Tue, 29 Jun 2021 04:36 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र

सार

  • विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने जताई चिंता, कहा-दुनिया भर में आतंकी गतिविधियों में बच्चों को लगाए जाने की बढ़ रही खतरनाक प्रवृत्ति
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विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा है कि दुनिया भर में आतंकी संगठनों में बड़ी संख्या में बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। खास तौर पर कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद होने की वजह से आतंकी संगठनों ने इसका जमकर फायदा उठाया और बच्चों को आतंकी गतिविधियों में लगाया। भारत ने कहा है कि यह एक खतरनाक और चिंताजनक प्रवृत्ति है। भारत ने साथ ही इसके लिए जिम्मेदार सभी तत्वों को मिलने वाले संरक्षण को खत्म करने का आह्वान किया।

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विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने सुरक्षा परिषद में ‘सशस्त्र संघर्ष और बच्चे’ विषय पर खुली बहस में कहा, कोरोना महामारी ने सशस्त्र संघर्ष की स्थितियों में बच्चों पर काफी नकारात्मक प्रभाव डाला है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं तक पहुंच में आज एक अड़चन देखने को मिल रही है। यह बहुत अहम है कि देश बाल संरक्षण संबंधी चिंताओं को ज्यादा अहमियत दें। उन्होंने कहा, इस समय में बच्चे आसानी से किसी गलत समूह का शिकार हो सकते हैं। स्कूल बंद होने से आतंकी संगठनों या हिंसक चरमपंथी विचारधारा वाले समूहों को बच्चों को बरगलाने का एक अवसर मिल गया है। शिक्षा के लिए अपनाए जा रहे ऑनलाइन माध्यमों के जरिये भी ऐसे आतंकी संगठन बच्चों को निशाना बना सकते हैं।

आतंकरोधी एजेंडे को लागू करने में राजनीतिक इच्छाशक्ति जताएं देश
विदेश सचिव ने कहा, बाल संरक्षण और आतंकरोधी एजेंडे को लागू करने में आज ज्यादा समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लिए राष्ट्रों को ज्यादा राजनीतिक इच्छाशक्ति जताने की जरूरत है। उन्होंने महात्मा गांधी के उस कथन का हवाला भी दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर दुनिया में असली शांति चाहिए तो हमें बच्चों से शुरुआत करनी होगी।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट पर जताया विरोध
शृंगला ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस की ‘बच्चे और सशस्त्र संघर्ष’ रिपोर्ट पर विरोध जताते हुए कहा, रिपोर्ट में वह आरोप भी शामिल हैं कि वे सशस्त्र संघर्ष या अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है। उन्होंने कहा, इस तरह का नजरिया एजेंडे का राजनीतिकरण करता है। गुटेरेस ने रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन पर चिंता जताई थी।

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