संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति
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भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को आत्ममंथन करना चाहिए कि सीरिया के मुद्दे पर उसकी ‘कार्रवाइयों एवं निष्क्रियता’ की क्या कीमत चुकानी पड़ी। भारत ने जोर दिया कि विश्व निकाय को तत्काल आम सहमति बनाने की जरूरत है और युद्धग्रस्त देश के लोगों की परेशानी दूर करने के मुद्दे पर वह अविचलित नहीं रह सकता है।
भारतीय राजदूत तिरुमूर्ति ने कहा, हमें तत्काल आम सहमति बनाना जरूरी
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की अध्यक्षता में सीरिया मुद्दे पर हुई सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि पिछला दशक सीरिया के लिए खोने वाला था, खासतौर पर बच्चों और युवाओं के लिए, जिन्होंने 2011 से हिंसा और संघर्ष के सिवाय कुछ नहीं देखा है।
उन्होंने कहा, यह पीड़ा परिषद के सदस्यों तक पहुंचनी चाहिए। तिरुमूर्ति ने जोर दिया कि मानवीय हालात पर तत्काल आम सहमति जरूरी है और सीरिया के लोगों के कष्ट दूर करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। हम शांत नहीं रह सकते हैं।
ब्लिंकेन का मिला साथ
यूएनएससी में भारत द्वारा जताए गए विचार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन का साथ भी मिला। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद सदस्यों को जिम्मेदारी निभानी चाहिए। ब्लिंकेन ने जोर दिया कि सीरिया के लोगों को मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए तीन सीमा मार्गों को फिर से मंजूरी दी जाए। उन कृत्यों को रोका जाए जिसके बहाने इन रास्तों को रोकने के लिए हमले हों।