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भारत की बेटी: शिरिषा बांदला वर्जिन गैलेक्टिक अंतरिक्षयान से तय करेंगी अंतरिक्ष का सफर

Sat, 10 Jul 2021 09:50 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, ह्यूस्टन।

सार

अंतरिक्ष के सफर पर आज निकलेगी भारत की ये बेटी, सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला के बाद शिरिषा बांदला भरेंगी उड़ान।
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एरोनॉटिकल इंजीनियर शिरिषा बांदला। - फोटो : Website : https://www.virgingalactic.com
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विस्तार
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सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला के बाद भारत की एक और बेटी रविवार को शिरिषा बांदला अंतरिक्ष की सैर करने वाली है। आंध्र प्रदेश के गुंटूर में जन्मीं और टेक्सास के ह्यूस्टन में पली-बढ़ी शिरिषा, अंतरिक्षयान बनाने वाली वर्जिन गैलेक्टिक कंपनी के अरबपति संस्थापक सर रिचर्ड ब्रेनसन और पांच अन्य सदस्यों के साथ न्यू मेक्सिको से अंतरिक्ष के सिरे तक का सफर करेंगी।  

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अंतरिक्षयान बनाने वाली दिग्गज कंपनी के निर्धारित पहले पूर्ण चालक दल युक्त उड़ान परीक्षण का हिस्सा बनने वाली एरोनॉटिकल इंजीनियर, 34 वर्षीय शिरिषा बांदला अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की तीसरी महिला होंगी। उन्होंने ट्वीट किया, मैं यूनिटी 22 के अद्भुत क्रू और एक ऐसी कंपनी का हिस्सा बनने के लिए अविश्वसनीय रूप से सम्मानित महसूस कर रही हूं जिसका मिशन सभी के लिए अंतरिक्ष उपलब्ध कराना है।

वर्जिन गैलेक्टिक पर बांदला के प्रोफाइल के मुताबिक, वह अंतरिक्ष यात्री संख्या 004 होंगी और उड़ान के दौरान उनकी भूमिका ‘रिसर्चर एक्सपीरियंस’ की होगी। गैलेक्टिक की वेबसाइट के मुताबिक बांदला, यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा से एक प्रयोग का इस्तेमाल कर मानव-प्रवृत्त अनुसंधान अनुभव का मूल्यांकन करेंगी जिसमें हाथ में पकड़े जाने वाले ट्यूबों को उड़ान के दौरान विभिन्न मौकों पर सक्रिय किया जाएगा।
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मैं नि:शब्द हूं 
शिरिषा बांदला ने वर्जिन गैलेक्टिक के ट्विटर अकाउंट पर छह जुलाई को पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, मैंने जब पहली बार सुना कि मुझे यह मौका मिल रहा है तो मैं नि:शब्द हो गई थी। यह अद्भुत अवसर है जब अंतरिक्ष में विभिन्न पृष्ठभूमि, स्थान और अलग-अलग समुदाय के लोग होंगे।  

भारत में सिर्फ 5 साल तक रहीं
भारत में शिरिषा केवल 5 साल तक ही रही हैं। उन्होंने पड्रर्यू यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिकल/एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक के बाद जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली है। वे बचपन से ही अंतरिक्ष जाना चाहती थीं लेकिन दृष्टि कमजोर होने के कारण वे वायुसेना में पायलट नहीं बन सकीं। लेकिन अब वे अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान अंतरिक्षयात्रियों पर होने वाले असर का अध्ययन करेंगी।

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