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India Birth Rate: भारत में घटती जन्म दर पर एलन मस्क ने जताई चिंता, रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंचा आंकड़ा

Sun, 07 Jun 2026 01:36 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क

सार

एलन मस्क ने कहा है कि भारत की जन्म दर अब रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच गई है। हालिया डेटा के अनुसार देश की फर्टिलिटी रेट में लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जिससे जनसंख्या रुझानों पर असर पड़ सकता है।

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एलन मस्क, टेस्ला और एक्स के मालिक - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने भारत की घटती जन्म दर को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि भारत की जन्म दर अब रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच चुकी है, जो लंबे समय में जनसंख्या संरचना पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

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सोशल मीडिया एक्स पर साझा किया डेटा
एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट को साझा करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत की जन्म दर कई साल पहले ही शिक्षित वर्ग में रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आ चुकी है। मस्क ने जिस डेटा का हवाला दिया, उसमें कहा गया है कि भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate - TFR) घटकर लगभग 1.9 पर आ गई है, जबकि रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 माना जाता है।

बड़े शहरों में और तेज गिरावट
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश की राजधानी दिल्ली में फर्टिलिटी रेट घटकर करीब 1.2 तक पहुंच गई है, जो कई विकसित देशों से भी कम मानी जा रही है।  विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में शिक्षा, जीवनशैली और आर्थिक कारणों से परिवार का आकार लगातार छोटा हो रहा है।
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UN रिपोर्ट में भी पुष्टि
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट 2025 में भी बताया गया है कि भारत की फर्टिलिटी रेट 2.1 से नीचे गिरकर 1.9 पर आ चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीरे-धीरे कम हो रही है।

जनसंख्या रुझानों में बड़ा बदलाव
भारत की आबादी वर्तमान में 1.46 अरब से अधिक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दशकों में घटती जन्म दर देश की आर्थिक संरचना, श्रम बाजार और सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि देश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार हुआ है, लेकिन असमानता, बाल विवाह और महिलाओं से जुड़ी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।

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