दुश्मनी पक्की है...
मैंने एक बार दिल्ली से वापस आते समय पाकिस्तानी मरीजों का भरा हुआ जहाज देखा था। सभी इलाज करवाने के लिए भारत गए थे। रातों-रात भारत-पाकिस्तान सरहद पर तनाव पैदा हो गया। वीजा रद्द होने लगे और सभी मरीज तुरंत वापस भागे। कई मरीजों ने अस्पताल वाले कपड़े पहन रखे थे। एक मरीज की बांह में ड्रिप लगी हुई थी। भारत-पाकिस्तान की दुश्मनी पक्की है। हमारा कोई भाईचारा नहीं है। कम से कम हम
इंसान की औलाद तो बन सकते हैं। कम से कम अपने बच्चों को अपनी दुश्मनी की जहर के टीके तो ना लगाएं। कई साल पहले मुझे लंदन में एक भारतीय जवान मिला। मेरे हाथ में गोल्डलीफ की डब्बी देखकर मेरे पास आया और बोला, 'पाकिस्तानी लगते हो। सिगरट तो पिलाओ।' मैंने पूछा, 'हां जवान! कभी गए हो पाकिस्तान?'
इस्लामाबाद बहुत अच्छा शहर है...
उसने जवाब दिया, 'मैं आठवीं जमात में था, मेरी मां इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में काम करती थी। मैं इस्लामाबाद के एक पार्क में एक दोस्त के साथ खेल रहा था।' वह आगे बोला, 'आपके जसूसों ने पकड़ लिया और अच्छी तरह पिटाई की।
इस्लामाबाद बहुत अच्छा शहर है अभी तक नहीं भूला, पर वह पिटाई भी नहीं भूली।' भारत-पाकिस्तान एक-दूसरे का जो भी बंद कर सकते थे, वह कर चुके हैं। अब यही हो सकता है कि हम अपना आतिफ असलम अपने पास रखें।
आप आशा भोंसले की आवाज पर पिंजरा बना लें। जिस बच्चे के दिल में सुराख है उसे अल्ला के सहारे छोड़ दें। हमें उसकी कोई परवाह नहीं। ये याद रखना कि सर्दियों में जो काली-जहरीली हवा चलती हैं, जिसे हम फॉग कहते हैं, वो ये नहीं पूछती कि ये भारतीय पंजाब है या पाकिस्तानी। जब भूचाल आएगा तो उसे भी वीजा के लिए आवेदन नहीं भरना। जब सूखा पड़ेगा या बाढ़ आएगी तब यह भी वाघा सरहद पर कतार में लगकर नहीं आएंगे।
पड़ोसी अच्छा हो या बुरा उसकी जरूरत पड़ ही जाती है। यह ना हो कि हम किसी मुसीबत में हों और किसी के घर की घंटी बजाएं और दरवाजा खोलने वाला कोई ना हो।