विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देश निरस्त्रीकरण, वैश्विक शांति, उत्तर-दक्षिण वार्ता, मानवाधिकार, पारिस्थितिक संरक्षण और युद्ध के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में एक-दृसरे के साथी रहे हैं।
न्यूजीलैंड भारत के साथ राजनीतिक, व्यापारिक, रक्षा, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक सहित हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएगा। इसके साथ ही न्यूजीलैंड का मानना है कि 2011 में शुरू की गई भारत के लिए द्वार खोलो नीति काफी सफल रही है। दोनों देशों ने वेलिंग्टन में 5वां विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) आयोजित किया। इस दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के उच्च स्तरीय अधिकारियों ने बैठक कर द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की है।
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विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में बताया कि शनिवार को भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) सौरभ कुमार और न्यूजीलैंड के अमेरिका और एशिया समूह के उप सचिव डेबोरा गिल्स की सह-अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में आई हालिया गति और बढ़ाने की जरूरत पर ध्यान दिया। दोनों देशों परस्पर भागीदारी पर संतोष व्यक्त करते हुए राजनीतिक, आर्थिक और व्यापार सहयोग, रक्षा आदान-प्रदान, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ लोगों से लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने पर सहमति जताई।
इसके अलावा जी-20, हिंद-प्रशांत आसियान, राष्ट्रमंडल और संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे के सहयोग का संकल्प लिया व वैश्विक मसलों पर परस्पर हितों पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में विशाल संभावनाओं पर जोर दिया और जी2जी (सरकार-से-सरकार) और बी2बी (बिजनेस-टू-बिजनेस) बातचीत को और बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।
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वैश्विक शांति के लिए सहयोगी
मंत्रालय ने बताया कि दोनों देश निरस्त्रीकरण, वैश्विक शांति, उत्तर-दक्षिण वार्ता, मानवाधिकार, पारिस्थितिक संरक्षण और युद्ध के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में एक-दृसरे के साथी रहे हैं। इसके अलावा आतंकवाद, प्रवासी समस्याओं पर भी दोनों देशेां का ध्यान रहा है। वही, न्यूजीलैंड के अधिकारियों ने बताया कि पिछली सदी के अंत में भारतीयों ने न्यूजीलैंड आना शुरू किया और फिलहाल इनकी 1.75 लाख आबादी है, जिन्होंने न्यूजीलैंड को अपना स्थायी घर बना लिया है।