सार
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समावेशी शिक्षा मॉडल की सराहना हुई। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधार्थी जैन ह्यूबल ने कहा कि यह नीति दिव्यांग बच्चों के अधिकारों को मजबूत करती है और परीक्षा-केंद्रित व्यवस्था से आगे बढ़कर कौशल व योग्यता आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 61वें सत्र में भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के समावेशी शिक्षा मॉडल की वैश्विक स्तर पर सराहना की गई है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधार्थी जैन ह्यूबल ने जेनेवा में परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की यह नीति दिव्यांग बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
ह्यूबल ने रेखांकित किया कि पारंपरिक परीक्षा-केंद्रित प्रणाली के बजाय भारत अब कौशल और योग्यता आधारित शिक्षा पर जोर दे रहा है। उन्होंने विशेष रूप से अक्षर फाउंडेशन जैसे संगठनों के कार्यों का उल्लेख किया, जो सरकारी स्कूलों के साथ मिलकर दिव्यांग छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ रहे हैं।
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21 लाख विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को बनाया जा रहा सशक्त
ह्यूबल के अनुसार सहायक तकनीकों और लचीले शिक्षण रास्तों के माध्यम से भारत के लगभग 21 लाख विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से भारत के इस होलिस्टिक (समग्र) शिक्षा मॉडल को समर्थन देने की अपील की, जो न केवल साक्षरता बल्कि रोजगार और सामाजिक भागीदारी पर भी केंद्रित है।
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अब समझिए क्या है राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020?
बता दें कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव लेकर आई है। यह नीति पारंपरिक परीक्षा-केंद्रित मॉडल से हटकर कौशल और योग्यता आधारित शिक्षा पर जोर देती है। एनईपी 2020 का लक्ष्य बच्चों के समान अवसर, समावेशी शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देना है। दिव्यांग छात्रों और पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान इसके मुख्य हिस्से हैं।
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