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भारत को 76 लाख नर्स की जरूरत: अभी 10 हजार लोगों पर केवल 10.5 डॉक्टर, देश को 19 लाख चाहिए; कोसों आगे हैं US-चीन

Wed, 26 Aug 2026 06:46 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
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डॉक्टरों के अलावा नर्सों की भी कमी (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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भारत में मरीजों की बढ़ती जरूरत के मुकाबले डॉक्टर, नर्स व विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मी काफी कम हंै। देश में प्रति 10,000 लोगों पर 10.5 डॉक्टर और 10.8 नर्स हैं। देश में प्रति 10,000 आबादी पर औसतन 73.1 स्वास्थ्यकर्मी हैं। सभी लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने को 19 लाख डॉक्टरों, 76 लाख नर्सों की जरूरत है।

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समस्या केवल डॉक्टरों और नर्सों तक सीमित नहीं
द लैंसेट पब्लिक हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार 8.1 फार्मासिस्ट व फार्मेसी सहायक, 2.5 दंत चिकित्सक हैं। सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को मिलाने पर कुल संख्या 73.1 प्रति 10,000 आबादी बैठती है। हालांकि, समस्या केवल डॉक्टरों और नर्सों तक सीमित नहीं है।

विशेषज्ञों की उपलब्धता भी बेहद कम
मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, पुनर्वास, दृष्टि देखभाल और चिकित्सा तकनीकी सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों की उपलब्धता भी बेहद कम है। देश में प्रति 10,000 आबादी पर आहार एवं पोषण विशेषज्ञ तथा मनोवैज्ञानिकों की संख्या महज 0.3 है।
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अमेरिका में कितने लोगों पर 30 डॉक्टर
इस मामले में चीन और अमेरिका से भारत काफी पीछे है। चीन में प्रति 10,000 आबादी पर 129 स्वास्थ्यकर्मी हैं। डॉक्टरों की संख्या 31 से अधिक और नर्सों की 51 प्रति 10,000 आबादी पर है। अमेरिका में यह अंतर और बड़ा है। वहां प्रति 10,000 लोगों पर 678 स्वास्थ्यकर्मी हैं। उनमें 30 डॉक्टर और 161 नर्सिंग स्टाफ हैं। मध्यम स्तर के सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए प्रति 10,000 आबादी पर 23.8 डॉक्टर, 64.5 नर्स व दाइयां, 5.2 दंत चिकित्सक और 5.6 फार्मासिस्ट चाहिए।

महिलाओं के कंधों पर स्वास्थ्य व्यवस्था
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। कुल स्वास्थ्यकर्मियों में 62% महिलाएं हैं। वैसे, अलग-अलग पेशों में उनकी भागीदारी समान नहीं है। डॉक्टरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 35.3% है। नर्सिंग स्टाफ में यह 90% और दाइयों व प्रसूति सहायकों में 89% है। दंत चिकित्सकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 31% है, जबकि फार्मासिस्टों में यह सिर्फ 5.2% है।

दुनिया को चाहिए 3.44 करोड़ अतिरिक्त स्वास्थ्यकर्मी
यह संकट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। 1990 से 2023 के बीच दुनिया का स्वास्थ्य कार्यबल 3 गुना बढ़कर 4.09 करोड़ से 12.21 करोड़ हो गया। इसके बावजूद सभी लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए दुनिया को 3.44 करोड़ अतिरिक्त स्वास्थ्यकर्मी चाहिए। सबसे बड़ी कमी नर्सों और दाइयों की है। वैश्विक स्तर पर 2.39 करोड़ अतिरिक्त नर्सों व दाइयों की जरूरत है।

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