लेविस्की के अनुसार चीन की इस चाल के पीछे कई अहम मोड़ हैं। चीन ने समय चुनने में विशेष सावधानी बरती है। भारत 90 दिनों से कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन में है। ऐसे में सरकार पर तनाव कम नहीं है, चीन ने इसका फायदा उठाते हुए गलवां घाटी के पास सैन्य गतिविधियां बढ़ा दीं।
अपने पांचों कमान में रह चुके अनुभवशाली लेफ्टिनेंट जनरल शू किलिंग को पश्चिमी कामन का जिम्मा सौंपना भी रणनीति का हिस्सा था। चीन ने गलवां में अपने सैनिकों की संख्या भी तेजी से बढ़ाई। कुछ साक्ष्य ऐसे भी मिले हैं जिनके मुताबिक गलवां के पास 12 होवित्जर और टाइम 88 टैंक पहुंचाए गए।
युद्ध नहीं बस दमखम दिखाने की चाल
लेविस्की ने कहा, चीन की रणनीतिक तैयारी दरअसल किसी युद्ध की मंशा से नहीं है। बल्कि यह महज सीमा पर तनाव बढ़ाकर दमखम दिखाने की चाल है। वह दक्षिण सागर में भी इसी तरह की रणनीति अपनाता है।