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Russia : रूस में एक साथ सैन्याभ्यास करेंगे भारत-चीन के सैनिक, बेलारूस-ताजिकिस्तान और मंगोलिया भी साथ होंगे

Thu, 18 Aug 2022 05:02 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, बीजिंग (चीन)।

सार

पिछले साल भी भारत ने रूस में जेपेड-2021 सैन्याभ्यास में हिस्सा लिया था, जिसमें चीन और पाकिस्तान सहित 17 देशों ने भाग लिया था। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, वोस्तोक-2022 सैन्याभ्यास 30 अगस्त से 5 सितंबर तक आयोजित होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Agency
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विस्तार
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दो साल से ज्यादा समय से जारी सैन्य गतिरोध के बीच भारत और चीन के सैनिक रूस में होने वाली विश्व सैन्याभ्यास में एक साथ भाग लेते नजर आएंगे। चीन ने बुधवार को वोस्तोक-2022 सैन्याभ्यास भाग लेने का एलान किया। इस महीने के अंत में होने वाली इस कवायद में भारतीय सेना भी शामिल होने जा रही है।

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चीनी रक्षा मंत्रालय ने कहा, चीनी और रूसी सेनाओं के बीच वार्षिक सहयोग योजना के तहत, चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) सैन्याभ्यास में भाग लेने के लिए कुछ सैनिकों को रूस भेजेगी। भारत के साथ बेलारूस, ताजिकिस्तान, मंगोलिया और अन्य देश भी सेनाभ्यास में हिस्सा लेने जा रहे हैं। 

वोस्तोक-2022 सैन्याभ्यास में भारतीय सैनिकों की भागीदारी पर भारतीय सेना या रक्षा मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई। चीनी रक्षा विभाग ने कहा, पीएलए के सैनिकों का उद्देश्य, सैन्याभ्यास में हिस्सा लेने वाले देशों की सेनाओं के साथ व्यावहारिक और मैत्रीपूर्ण सहयोग को गहरा करना और दूसरे देश के सैनिकों के साथ रणनीतिक समन्वय को बढ़ाना है। 
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पिछले साल भी रूस में किया था सैन्य अभ्यास
पिछले साल भी भारत ने रूस में जेपेड-2021 सैन्याभ्यास में हिस्सा लिया था, जिसमें चीन और पाकिस्तान सहित 17 देशों ने भाग लिया था। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, वोस्तोक-2022 सैन्याभ्यास 30 अगस्त से 5 सितंबर तक आयोजित होगा। यह सैन्याभ्यास रूस के सेना प्रमुख जनरल वालेरी गेरासिमोव की कमान के तहत पूर्वी सैन्य जिले के 13 प्रशिक्षण मैदानों में होगा। रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि इस अभ्यास में सैनिक पूर्वी क्षेत्र में सैन्य सुरक्षा बनाए रखने के उपायों का अभ्यास करेंगे।

वर्तमान वैश्विक तनाव से नहीं संबंध
चीन ने स्पष्ट किया है कि इस युद्धाभ्यास का वर्तमान वैश्विक तनाव से कोई संबंध नहीं है। इसका उद्देश्य भाग लेने वाले देशों की सेनाओं के साथ प्रायोगिक और मित्रतापूर्ण सहयोग बढ़ाना है।

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