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India-China: 'सीमा विवाद की आंच व्यापार समेत द्विपक्षीय मुद्दों तक न पहुंचे'; चीनी विदेश मंत्रालय ने दिया बयान

Fri, 19 Jan 2024 11:25 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग / नई दिल्ली

सार

भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय ने बड़ा बयान दिया है। पड़ोसी देश की सरकार ने कहा है कि चीन-भारत सीमा विवाद ऐतिहासिक मुद्दा है। इसका असर दोनों देशों के व्यापार और दूसरे द्विपक्षीय मुद्दों पर नहीं होना चाहिए। विदेश मंत्रालय के मुताबिक संबंधों को उचित तरीके से सहेजना चाहिए। विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है। इस मुद्दे पर अक्सर दोनों देश आमने-सामने आते हैं। विस्तारवादी नीति पर चलने वाली चीनी सरकार के अड़ियल रूख के कारण भारत के साथ रिश्ते शांत लेकिन तनावपूर्ण रहते हैं। ताजा घटनाक्रम में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास करने के संकेत दिए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ ने स्विटजरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि सीमा पर दोनों देशों के संबंध स्थिर होने पर चीन और भारत के बीच व्यापार और दूसरे द्विपक्षीय मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
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सीमा विवाद की आंच व्यापार समेत द्विपक्षीय मुद्दों तक न पहुंचे
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी प्रवक्ता एक भारतीय अधिकारी की कथित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय अधिकारी ने कथित तौर पर कहा है कि सीमा पर गतिरोध खत्म होने और संबंध स्थिर होने पर चीन में निवेश करने को लेकर भारत अपने नियमों को बदलने पर विचार कर सकता है। चीन के रुख को दोहराते हुए माओ ने भारत-चीन संबंधों पर कहा, चीन-भारत सीमा पर स्थिति कुल मिलाकर स्थिर है। सीमा विवाद से जुड़े मुद्दे के समाधान की प्रक्रिया से दोनों देशों के सामान्य विकास पर असर नहीं पड़ना चाहिए।

करीब 43 महीने से बना हुआ है तनाव
गौरतलब है कि मई, 2020 के बाद से भारत और चीन के संबंधों में तल्खी बरकरार है। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर दोनों देशों के रिश्तों पर कहते हैं कि लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीनी सैनिकों का जमावड़ा सभी द्विपक्षीय संबंधों का उल्लंघन है। उन्होंने हाल ही में एक सवाल पर कहा था कि शांति बरकरार रखना दोनों पक्षों की जवाबदेही है, लेकिन चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिक हजारों की संख्या में सीमा पर हैं। नतीजतन सतर्कता बरतते हुए भारत को भी सैनिक तैनात करने पड़े हैं।
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गलवां घाटी की झड़प के बाद संबंधों में तल्खी
बता दें कि 15-16 जून, 2020 की दरम्यानी रात लद्दाख की गलवां घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। कम से कम 38 चीनी सैनिक भी मारे गए थे। हालांकि, चीन ने इसकी आधिकारिक संख्या कभी स्वीकार नहीं की। इस अप्रत्याशित घटना के बाद से दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच 14 से अधिक दौर की वार्ता हो चुकी है। भारत अधिक संख्या में तैनात चीनी सैनिकों को पीछे हटाने की मांग कर रहा है लेकिन चीन अड़ा हुआ है। इस कारण गतिरोध बरकरार है।

भारत-चीन के बीच रिकॉर्ड 136.2 बिलियन डॉलर का व्यापार
इस संबंध में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, द्विपक्षीय वार्ता चलती रहनी चाहिए। दोनों देशों के बीच 100 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार होता है। आंकड़े हर साल बढ़ रहे हैं। इससे दोनों देशों की आर्थिक ताकत भी साबित होती है। ऐसे में व्यापारिक सहयोग को देखते हुए सीमा विवाद के कारण इसमें बाधा नहीं डालनी चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहने से भारत में निवेश और कारोबारी संचालन करने वाली चीनी कंपनियों को बेहतर माहौल मिलेगा। कंपनियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना भेदभाव वाला कारोबारी माहौल मिल सकता है। जनवरी से दिसंबर, 2023 के बीच दोनों देशों के बीच रिकॉर्ड 136.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ।
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