अभी हाल ही में दक्षिण चीन सागर में चीन की ओर से उसकी सैन्य गतिविधियां बढ़ाए जाने की खबर आई थी, जिसके बाद अमेरिका ने भी अपने पोत इस क्षेत्र के लिए रवाना कर दिए थे।
वेल्स ने दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रमता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि चीन पूरे दक्षिण सागर पर दावा करता है, जबकि उसका वियतनाम, मलयेशिया, फिलीपीन, ब्रूनेई और ताइवान के साथ विवाद है। बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में कई द्वीपों पर सैन्य ठिकाने बना लिए हैं। वेल्स ने कहा कि यह इलाका खनिज संपन्न है और वैश्विक व्यापार के लिए भी अहम रूट है।
चीन के खिलाफ एक समान विचार वाले मुल्क इकट्ठा हो रहे
वेल्स ने कहा कि आप देख सकते हैं कि चीन की नीति के खिलाफ एक समान विचार वाले देश एकत्रित हो रहे हैं। फिर वो चाहे आसियान के जरिए, इसके सदस्य देशों का इकट्ठा होना हो या दूसरे कूटनीतिक समूहों के जरिए।
उन्होंने कहा कि अमेरिका, जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया और दुनिया के दूसरे मुल्क द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने आर्थिक सिद्धातों को लागू करने की कोशिश में जुटे हुए हैं, जिसमें हर राष्ट्र के लिए मुक्त और खुले व्यापार की बात की गई है।
वेल्स ने कहा कि अमेरिका ऐसा वैश्विक तंत्र चाहता है, जिसमें हर मुल्क को फायदा हो ना कि ऐसा तंत्र जिसमें चीन का आधिपत्य हो। मुझे लगता है कि सीमा विवाद का यह उदाहरण चीन द्वारा उत्पन्न खतरे की याद दिलाता है।
सूत्रों ने जानकारी दी है कि चीनी सैनिकों ने पेंगोंग झील के आसपास के क्षेत्रों में बीते कुछ दिनों से अपनी उपस्थिति काफी बढ़ा दी और यहां तक कि झील में अतिरिक्त नाव भी ले आए हैं। सूत्रों ने बताया कि ऐसी स्थिति में दोनों पक्षों ने डेमचौक और दौलत बेग ओल्डी जैसे स्थानों पर अधिक सैनिक तैनात किए हैं।
बता दें कि गलवां के आसपास का क्षेत्र पिछले छह दशकों से दोनों पक्षों के बीच विवाद का विषय रहा है। सूत्रों ने कहा कि चीनी पक्ष ने गलवां घाटी क्षेत्र में बड़ी संख्या में टेंट लगाए हैं। इसके बाद भारत ने भी इलाके में चौकसी बरतने के लिए अपने अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं।
चीन ने जताई सड़क निर्माण पर आपत्ति
दरअसल, चीनी पक्ष ने गलवां नदी के आसपास भारत की ओर से एक महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण किए जाने को लेकर अपनी आपत्ति जताई थी। सूत्रों ने कहा कि इसके बाद इस सड़क का निर्माण फिलहाल रोक दिया गया है। बता दें कि पांच मई को लगभग 250 भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और डंडों के साथ झड़प हुई थी। इसमें दोनों तरफ के कई सैनिक घायल हो गए थे। दोनों सेनाओं के बीच बढ़ते तनाव पर न तो सेना और न ही विदेश मंत्रालय ने कोई टिप्पणी की है।