भारत और कनाडा के बीच जारी तनाव
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भारत और कनाडा के बीच जारी तनाव में एक नए देश चीन का भी नाम जुड़ गया है। इससे पहले इस तनाव में पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे थे। एक आतंकी की हत्या के बाद शुरू हुआ ये विवाद भारत विरोधी देशों की सांठगांठ तक पहुंच गया है। कनाडाई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पूरे विवाद में चीन का फायदा हो सकता है।
आखिर चीन की भूमिका कहां से आ गई? जस्टिन ट्रूडो पर क्यों चीन को फायदा पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं? पहले कब चीन और ट्रूडो के गठजोड़ की बात कनाडाई मीडिया कह चुका है? पाकिस्तान कैसे इस विवाद की आग में घी डालने का काम कर रहा है? आइये समझते हैं...
भारत-कनाडा संबंध।
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पहले जानते हैं भारत-कनाडा विवाद क्या है?
इस पूरे विवाद की जड़ में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामला है। दरअसल, निज्जर की 18 जून 2023 को कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसे कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया के सरी स्थित गुरुनानक सिख गुरुद्वारा के पास दो अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी। निज्जर खालिस्तान टाइगर फोर्स का प्रमुख था और भारत में एक घोषित आतंकवादी था।
इसी सोमवार यानी 18 सितंबर को निज्जर की हत्या को लेकर कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने वहां की संसद में भारत पर आरोप लगा दिए। ट्रूडो ने कहा कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों के पास यह मानने के कारण है कि भारत सरकार के एजेंटों ने ही निज्जर की हत्या की। कनाडाई एजेंसियां निज्जर की हत्या में भारत की साजिश की संभावनाओं की जांच कर रही हैं। ट्रूडो ने कहा कि कनाडा की धरती पर कनाडाई नागरिक की हत्या में किसी भी प्रकार की संलिप्तता अस्वीकार्य है।
वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय ने 19 सितंबर को कनाडा के आरोपों का पहली प्रतिक्रिया दी। भारत ने ट्रूडो के दावों को बेतुका और पूर्वाग्रह से प्रेरित बताते हुए इन्हें सिरे से खारिज कर दिया। इसके साथ ही भारत ने कहा कि इस तरह के आरोप सिर्फ उन खालिस्तानी आतंकी और कट्टरपंथियों से ध्यान हटाने के लिए जिन्हें लंबे समय से कनाडा में शरण दी जा रही है।
कनाडा और चीन के बीच तनाव
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विवाद में चीन का नाम कैसे आया?
कनाडा के अखबार नेशनल पोस्ट ने दावा किया है कि दोनों देशों के तनाव के बीच चीन एक ऐसा देश है जिसे सबसे ज्यादा इसका फायदा मिल सकता है। अखबार के मुताबिक, बीते एक साल से अधिक समय से ट्रूडो कनाडाई चुनावों में चीन के सत्ताधारी दल चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा विदेशी हस्तक्षेप को लेकर बचाव की मुद्रा में हैं। अब तक वह इस मामले में कोई ठोस जवाब नहीं दे सके हैं। ऐसे में यह विवाद उनकी चीन के साथ संदिग्ध साझेदारी को उजागर करता है।
कनाडा और चीन के बीच तनाव
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ट्रूडो पर क्यों लग रहे चीन से सांठगांठ के आरोप?
खुफिया दस्तावेजों के जरिए कनाडाई अखबार ग्लोब एन्ड मेल ने दावा किया था कि चीनी राजनयिक 2021 में ट्रूडो की लिबरल पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने के लिए काम कर रहे थे। इसके साथ ही चीन कंजर्वेटिव उम्मीदवारों को हराने के लिए काम कर रह था, जिन्हें वह अपने प्रति मित्रवत नहीं मानता था। दस्तावेजों से यह भी पता चला कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी कथित विरोधियों को चीन ले जाने के लिए कनाडा में गुप्त पुलिस स्टेशन संचालित करती है। कहा जाता है कि बाद में इन विरोधियों को कारावास और संभवतः मौत की सजा तक का सामना करना पड़ता है। कहा तो यहां तक जाता है कि चीन ने कनाडा में 2021 ही नहीं 2019 के चुनावों में भी जस्टिन ट्रूडो को जीतने में मदद की थी।
कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो
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चीनी सांठगांठ पर ट्रूडो की क्या सफाई?
चीन के साथ इस तरह की सांठगांठ पर जस्टिन ट्रूडो अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कनाडा की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी से लीक हुए दस्तावेजों में कई अशुद्धियां हैं। यहां दिलचस्प तो यह था कि ट्रूडो ने यह नहीं बताया कि वास्तव में क्या गलत था। उस समय ट्रूडो ने बस इतना कहा कि यह मुद्दा उन्हें बहुत चिंतित करता है और एजेंसियां इससे निपटेंगी।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो
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चीन को क्या फायदा मिलने की बात कर रहा कनाडा का मीडिया?
अखबार ने कहा है कि ट्रूडो के बाद विवाद में दूसरा बड़ा विजेता चीन है। विदेशी हस्तक्षेप की सार्वजनिक जांच कनाडा में आखिरकार शुरू हो गई लेकिन अब उस पर ध्यान केंद्रित नहीं है। यह संकट कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति को भी प्रभावित करता है, जिसकी शुरुआत नवंबर 2022 में हुई थी। इसमें चीनी नीतियों की आलोचना की गई थी और भारत के साथ मजबूत संबंध बनाने की मांग की गई थी। हालांकि, ताजा विवाद से कनाडा की यह नीति ठंडी पड़ गई। अखबार ने यह भी लिखा कि बेहद सफल जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के ठीक बाद भारत की प्रतिष्ठा को झटका लगा है जिसका फायदा उसके प्रतिद्वंद्वी चीन हो सकता है।
जस्टिन ट्रूडो
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क्या ट्रूडो को इसका चुनावी लाभ मिलेगा?
कनाडाई अखबार नेशनल पोस्ट की मानें तो विवाद में सबसे बड़े विजेता तो प्रधानमंत्री ट्रूडो ही हैं। इसमें कहा गया कि गर्मियों में सर्वे के बाद उनकी पार्टी कंजर्वेटिवों से पीछे थी। सोमवार को ट्रूडो जब संसद में आए तो उन्होंने यहां पहले दिन ही एजेंडा ला दिया जबकि विपक्ष मुद्रास्फीति और आवासन के मुद्दे पर विरोध की योजना बना रहा था। इस तरह से आम लोगों की जरूरत से जुड़े मुद्दों पर घिरी ट्रूडो सरकार ने सारी चर्चा दूसरी ओर मोड़ दी।
pak flag
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क्या पाकिस्तान भी आग में घी डाल रहा है?
इधर कनाडा में हो रहे भारत विरोधी प्रदर्शनों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की भी बात आ रही है। सूत्रों के मुताबिक आईएसआई कनाडा में होने वाले इस तरह के प्रदर्शनों के लिए बैनर-पोस्टर तैयार कर रही है। इस तरह के प्रदर्शनों के लिए बसों का भी इंतजाम आईएसआई की ओर से किया जा रहा है। यहां तक कि कनाडा में रह रहे पाकिस्तान मूल के लोगों को पहचान छुपाकर प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए कहा जा रहा है। इसके साथ ही कई खालिस्तानी आंतकियों की आईएसआई द्वारा आर्थिक मदद की खबरें भी अक्सर आती रहती हैं।
हालिया विवाद के बाद हिन्दुओं को कनाडा छोड़ने की धमकी देने वाले गुरपतवंत सिंह पन्नू और आईएसआई के बीच बैठक होने की भी खबरें हैं। सूत्रों के मुताबिक ISI के एजेंट्स ने कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों के साथ एक गुप्त बैठक की है। यह बैठक कनाडा के वैंकूवर में हुई। बैठक में गुरपतवंत सिंह पन्नू के साथ दूसरे खालिस्तानी संगठनों के प्रमुख भी मौजूद थे।