भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से ठंडे पड़े रिश्तों में अब तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल तीन दिवसीय दौरे पर कनाडा पहुंचे हैं। इस दौरान दोनों देशों ने साल 2026 के अंत तक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) पूरा करने और वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है।
यह भी पढ़ें-
US-Iran Tensions: दक्षिणी ईरान में अमेरिका का हवाई हमला, माइन बिछा रही नौकाएं और मिसाइल लॉन्च साइट बने निशाना
'पीएम कार्नी के भारत दौरे से रिश्तों में नई शुरुआत'
कनाडा की राजधानी ओटावा में मीडिया से बातचीत करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की फरवरी 2026 में भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि अब भारत और कनाडा नए लक्ष्य और नई सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से भी मुलाकात की है, इसकी जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर साझा की है।
साल के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते को पूरा करने का निर्देश
पीयूष गोयल ने बताया कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने निर्देश दिए हैं कि मुक्त व्यापार समझौते को इस साल के अंत तक पूरा किया जाए। इसके साथ ही मौजूदा व्यापार को 2030 तक लगभग 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 17 अरब डॉलर के आसपास है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरे में भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल कनाडा पहुंचा है। भारत से 112 बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि इस दौरे का हिस्सा बने हैं। इससे साफ है कि भारतीय उद्योग जगत कनाडा के साथ साझेदारी को लेकर काफी उत्साहित है।
मनिंदर सिधू और अनिता आनंद से मुलाकात
इस प्रतिनिधिमंडल में ऊर्जा, खनन, एयरोस्पेस, दूरसंचार, दवा उद्योग, कृषि, पर्यटन, वस्त्र, ऑटोमोबाइल और पूंजीगत सामान जैसे कई क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिधू और विदेश मंत्री अनिता आनंद से भी बातचीत की है। ऊर्जा क्षेत्र इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और कनाडा के विशाल प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए दोनों देश तेल, गैस और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाना चाहते हैं। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, विज्ञान और तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
यह भी पढ़ें-
ईरान के परमाणु भंडार पर ट्रंप सख्त: बोले- यूरेनियम खत्म करना जरूरी, अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी से बढ़ी हलचल
गौरतलब है कि साल 2025 के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में तनाव देखने को मिला था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में लगातार उच्च स्तरीय बातचीत के जरिए संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। अब दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।