भारत की गिरती विकास दर से बढ़ती चिंता के बीच अब अमेरिका-भारत बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) की अध्यक्ष निशा बिस्वाल ने कहा है कि भारत निवेश को आकर्षिक करने के लिए अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध का लाभ उठा सकता है। लेकिन निवेश को आकर्षित करने के लिए बहुत कुछ करना होगा।
दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों की पूर्व सहायक सचिव बिस्वाल ने इंडियन ओशियन कॉन्फ्रेंस से इतर समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, "हम एक वैश्विक वातावरण में हैं, जहां हम दुनियाभर की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक संकट को देख रहे हैं, तो यह आश्चर्यजनक नहीं है कि भारत भी कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है।
मुझे लगता है कि भारत एक वैश्विक वातावरण में लाभार्थी हो सकता है, जहां कंपनियां अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के कारण चीन में निवेश करने में संकोच कर रही हैं। इस समस्या को हल करने के लिए उन्हें (कंपनी) भारत की ओर देखना चाहिए, लेकिन वे उतने महत्वाकांक्षी नहीं हैं। भारत को उन कंपनियों को आकर्षित करने के लिए और अधिक करने की आवश्यकता है।"
उन्होंने ट्रंप का जिक्र करते हुए व्यापार असंतुलन पर कहा, "मैं जानती हूं कि राष्ट्रपति व्यापार असंतुलन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मैं वास्तव में कहूंगी कि अमेरिका और भारत दोनों का एक दूसरे से ज्यादा चीन के साथ असंतुलन है।
बिस्वाल ने आगे कहा कि वास्तव में हम भारत और अमेरिका के बीच व्यापार असंतुलन को थोड़ा कम कर रहे हैं और यह एक अच्छा संकेत है क्योंकि आप देखते हैं कि भारत संयुक्त राज्य अमेरिका से अधिक से अधिक ऊर्जा खरीद रहा है। मुझे विश्वास है कि व्यापार असंतुलन और नीचे जाने वाला है। अमेरिका भारत में और अधिक निवेश करना चाहता है।"
उन्होंने आगे कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में उस व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए सही दिशा में हैं। हम अमेरिकी कंपनियों को भारत में विकसित होते देखना चाहते हैं, भारत में अधिक निवेश करना चाहते हैं और यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अमेरिका भारतीय कंपनियों का स्वागत कर रहा है।"
लंबित व्यापार वार्ता पर बिस्वाल ने कहा, "मुझे उम्मीद है, मुझे नहीं पता कि क्या तिथि निर्धारित की गई है लेकिन दोनों नेताओं ने कहा है कि वे चाहते हैं कि इसे हल किया जाए, मुझे लगता है कि उद्योग उन परिणामों को देखना चाहता है और मुझे पता है कि यह उतना कठिन नहीं है।"