सार
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को लेकर पेरिस में फ्रांस-ब्रिटेन की मेजबानी में बड़ा सम्मेलन हुआ। भारत ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया, जहां विदेश सचिव विक्रम मिस्री शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग से निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करना रहा। फ्रांस के एलिसी पैलेस में हुई बैठक की अध्यक्षता मैक्रों और स्टार्मर ने की।
होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े वैश्विक व्यापार और सुरक्षा को लेकर फ्रांस और ब्रिटेन की मेजबानी में पेरिस में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। इस बैठक में कई देशों ने हिस्सा लिया, जिनका मकसद इस अहम समुद्री मार्ग से बिना रुकावट व्यापार सुनिश्चित करना था। भारत ने इस सम्मेलन में पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रतिनिधित्व किया। इससे पहले भी वे अप्रैल में इसी तरह की एक बैठक में वर्चुअल रूप से शामिल हुए थे।
बता दें कि भारत को इस सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भी मिला था, जिसकी पुष्टि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने की थी। यह बैठक फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित एलिसी पैलेस में हुई। इसकी अध्यक्षता फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने की।
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ईरान का बयान
हालांकि एक तरफ ये बैठक हो रही थी वहीं दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एलान किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला है और युद्धविराम की अवधि तक सभी व्यापारिक जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति दी गई है। ईरान ने कहा कि यह मार्ग पहले की तय की गई योजना के अनुसार ही खुला रहेगा और जहाजों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं होगी।
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समझिए होर्मुज क्यों है अहम?
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है। इसी कारण यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल जहां एक तरफ ईरान इसे खुला बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के कई देश इस रास्ते की सुरक्षा और स्थिरता को लेकर रणनीति बना रहे हैं। भारत जैसे देश भी इस पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग है।