बांग्लादेश सरकार के लिए भारत कितना अहम है और कैसे वहां के आंतरिक विकास में भारत की भूमिका बढ़ी है, ये शेख हसीना सरकार को बेहद गहराई से महसूस होने लगा है। भारत के साथ जो भी व्यापारिक समझौते हुए और खासकर बांग्लादेश में रेलवे के क्षेत्र में भारत ने जो भी मदद की पेशकश की उसे लेकर बांग्लादेश सरकार भारत की खासी अहसानमंद है।
ऐसा बांग्लादेश के विदेशमंत्री डॉ ए.के. अब्दुल मोमेन का मानना है। मोमेन इसे दोनों देशों के बीच रिश्ते का एक स्वर्णिम अध्याय मानते हैं।
भारत की ओर से बांग्लादेश को औपचारिक तौर पर 10 ब्रॉडगेज लोकोमोटिव सौंपे जाने के दौरान एक समारोह में मोमेन ने कहा कि शेख हसीना और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ सालों में दोनों देशों ने तरक्की की इबारत लिखी है।
पिछले साल अक्टूबर में शेख हसीना भारत आई थीं और तभी प्रधानमंत्री मोदी ने नेबरहुड फर्स्ट की अपनी नीति के तहत बांग्लादेश को 10 डीजल लोकोमोटिव इंजन देने का वादा किया था, जिसे पूरा करके अब दोनों देश एक दूसरे के और करीब आ गए हैं। इस मौके पर भारत और बांग्लादेश के विदेश और रेलवे मंत्रियों के साथ दोनों देशों के उच्चायुक्त और राजदूत भी मौजूद थे।
मोदी की जबरदस्त तारीफ करते हुए मोमेन ने बेनापोल पेट्रापोल रेलवे लिंक के जरिये व्यापारिक आवाजाही का रास्ता खोला और अब तक हमारे 50 कारगो बांग्लादेश पहंचने में सफल रहे, उससे बेशक बांग्लादेश के विकास के रूके हुए कामों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। साथ ही कोविड-19 के संकट के दौरान मदद सामग्री और दवाइयां मुहैया कराने में भारत की भूमिका बेहद उल्लेखनीय रही है।
बेशक बांग्लादेश और भारत के बीच जिस तरह सीमा से अवैध घुसपैठ और असम से बांग्लादेशियों के पलायन जैसी खबरें आती रही हैं और सीमा सुरक्षा बल को बांग्लादेश भी बीच-बीच में नसीहतें देता रहा है, ऐसे में बांग्लादेश और भारत के लिए लंबे समय के बाद एक सकारात्मक स्थिति देखने को मिली है।
जाहिर है भारत ने अपने मदद का वादा लगातार पूरा किया है, बेशक इसमें अड़चनें कई आई हों, लेकिन रेलवे के क्षेत्र में भारत की ओर से बांग्लादेश को की जा रही मदद ने एक नई उम्मीद जगाई है।