प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टीनूबू के साथ अपनी वार्ता के दौरान कहा कि भारत नाइजीरिया के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को उच्च प्राथमिकता देता है और वह रक्षा, ऊर्जा और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में संबंधों को बढ़ाने की दिशा में काम करेगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी ने नाइजीरिया को कृषि, परिवहन, किफायती दवाओं, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल परिवर्तन के मामले में भारत के अनुभवों का लाभ उठाने की पेशकश की। वहीं, राष्ट्रपति टिनुबू ने भारत द्वारा प्रस्तावित विकास सहयोग साझेदारी तथा स्थानीय क्षमता, कौशल और पेशेवर विशेषज्ञता के सृजन में इसके सार्थक प्रभाव की सराहना की।
'आतंकवाद, अलगाववाद जैसे मुद्दे पर दोनों देश करते रहेंगे काम'
अबुजा में बैठक के दौरान अपने उद्घाटन भाषण में पीएम मोदी ने आतंकवाद, अलगाववाद, समुद्री डकैती और मादक पदार्थों की तस्करी को प्रमुख चुनौतियों के रूप में पहचाना और कहा कि दोनों देश इनसे निपटने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। प्रधानमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में नाइजीरियाई राष्ट्रपति के साथ वार्ता को "बहुत सार्थक" बताया और कहा कि उन्होंने रणनीतिक साझेदारी को गति देने के बारे में बात की। उन्होंने कहा, रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत बनाने की अपार संभावनाएं हैं।" वार्ता के बाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सीमा शुल्क में सहयोग और सर्वेक्षण सहयोग को लेकर तीन सहमति ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
'नाइजीरिया के साथ रणनीतिक साझेदारी को देते हैं प्राथमिकता'
प्रधानमंत्री ने कहा, "हम नाइजीरिया के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को उच्च प्राथमिकता देते हैं...मुझे विश्वास है कि हमारी वार्ता के बाद हमारे संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होगा।" मोदी ने लगभग 60,000 की संख्या वाले भारतीय प्रवासी समुदाय को भारत-नाइजीरिया संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बताया और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए टीनूबू को धन्यवाद दिया।
प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि भारत पिछले महीने बाढ़ से प्रभावित नाइजीरियाई लोगों के लिए 20 टन राहत सामग्री भेज रहा है। उन्होंने पिछले साल भारत द्वारा आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ के जी20 का स्थायी सदस्य बनने का भी उल्लेख किया और इसे एक महत्वपूर्ण परिणाम बताया।
राष्ट्रपति भवन में पीएम मोदी और टीनूबू की बैठख
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता से पहले, मोदी और टीनूबू ने राष्ट्रपति भवन में आमने-सामने की बैठक की। इस दौरान सबसे पहले प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत भी किया गया। प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों पक्षों की तरफ से कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। इस बैठक में पीएम मोदी ने 'इकॉनोमिक कम्युनिटी ऑफ वेस्ट एशियन स्टेट्स' (ईकोवास) के अध्यक्ष के रूप में नाइजीरिया की भूमिका तथा बहुपक्षीय एवं बहुपक्षीय निकायों में उसके योगदान की सराहना की। ईकोवास पश्चिम अफ्रीका के 15 देशों का एक क्षेत्रीय राजनीतिक व आर्थिक संघ है।
बता दें कि पीएम मोदी तीन देशों की यात्रा के तहत नाइजीरिया में हैं। अबुजा से वे जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्राजील जाएंगे। आखिरी में पीएम मोदी गुयाना का दौरा करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी और टिनुबू ने मौजूदा द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की और भारत-नाइजीरिया रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। मंत्रालय ने कहा, "संबंधों की प्रगति को लेकर संतोष व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश, शिक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि 'इंटरनेशनल सोलर अलायंस' और 'इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस' में नाइजीरिया की सदस्यता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने राष्ट्रपति टिनुबू को भारत द्वारा शुरू की गई ऐसी ही अन्य पहलों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
नाइजीरिया छह दशकों से अधिक समय से भारत का करीबी साझेदार
अक्तूबर 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अफ्रीकी राष्ट्र की यात्रा के दौरान भारत-नाइजीरिया संबंधों को "रणनीतिक साझेदारी" का दर्जा दिया गया था। नाइजीरिया छह दशकों से अधिक समय से भारत का करीबी साझेदार रहा है। नई दिल्ली ने 1960 में नाइजीरिया के स्वतंत्र होने से दो साल पहले नवंबर 1958 में लागोस में अपना राजनयिक सदन स्थापित किया था। पश्चिम अफ्रीका में सबसे बड़े लगभग 60,000 के बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय की उपस्थिति दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों के महत्व को बढ़ाती है।