अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड कई मौकों पर भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम का श्रेय ले चुके हैं। अब इस कड़ी में उनके अन्य अधिकारी अलग दावे कर रहे हैं। बता दें कि, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा है कि, दोहा में एक कश्मीर वेटर ने उनसे दोनों देशों का युद्ध रुकवाने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भारत-पाकिस्तान युद्ध विराम कराने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को श्रेय दिया और एक कश्मीरी वेटर की कृतज्ञता का हवाला दिया, हालांकि भारतीय अधिकारियों ने इसमें अमेरिकी भागीदारी से इनकार किया था। सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा- दोहा में वेटर के रूप में काम करने वाले एक कश्मीरी व्यक्ति ने भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए सैन्य संघर्ष को कम करने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के लिए व्यक्तिगत रूप से उन्हें धन्यवाद दिया है।
'राष्ट्रपति ट्रंप को नहीं मिल रहा पर्याप्त श्रेय'
लेविट के अनुसार, वेटर ने कहा कि उसे अभी-अभी सूचित किया गया था कि वह युद्ध विराम के बाद घर लौट सकता है, जो उसका मानना है कि अमेरिकी हस्तक्षेप के कारण संभव हुआ है। 'उसने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को वास्तव में परमाणु युद्ध को रोकने के लिए पर्याप्त श्रेय नहीं मिल रहा है और वे सही हैं।
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद बिगड़े हालात
बता दें कि, 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद बढ़े तनाव के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष इस महीने की शुरुआत में चार दिनों तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के रूप में जारी रहा। 10 मई को दोनों देशों ने संघर्ष विराम के लिए सहमति जताई। इसे लेकर ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि अमेरिका ने संघर्ष विराम की मध्यस्थता की, लेकिन भारतीय सरकारी सूत्रों ने इस दावे को खारिज कर दिया है। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि संघर्ष विराम दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों के बीच सीधे समझौते के परिणामस्वरूप हुआ, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की भागीदारी नहीं थी।
'ट्रंप को विरासत में मिले दुनिया भर के सभी संघर्ष'
हालांकि, लेविट ने इस घटनाक्रम को ट्रंप की कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप को दुनिया भर में बहुत सारे संघर्ष विरासत में मिले हैं और वे एक-एक करके उनसे निपट रहे हैं। मध्य पूर्व की इस ऐतिहासिक यात्रा ने इस क्षेत्र में अमेरिकी विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ को चिह्नित किया है जो अंततः मध्य पूर्व के स्वर्ण युग की शुरुआत करेगा! शक्ति के माध्यम से शांति बहाल हो रही है!'