कॉप में बढ़ती भीड़ के बीच इस पर बहस तेज हो गई कि आखिर इसमें शामिल लोग कौन हैं, उनकी क्या भूमिका है और इनका इसमें शामिल होना जलवायु परिवर्तन संबंधी लक्ष्यों को पाने के लिए कितना जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक जलवायु सम्मेलनों में हर वर्ष बढ़ती भागीदारों की संख्या इनके सार्थक साबित होने पर ही सवाल खड़े करने लगी है। वर्ष 2021 में ग्लासगो में हुए कॉप-26 में भागीदारों की संख्या 40 हजार थी और शर्म अल शेख में कॉप-27 में 50,000 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। हाल में दुबई में कॉप-28 में सारे रिकॉर्ड टूट गए और भागीदारों की संख्या 97,000 पर पहुंच गई।
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कॉप में बढ़ती भीड़ के बीच इस पर बहस तेज हो गई कि आखिर इसमें शामिल लोग कौन हैं, उनकी क्या भूमिका है और इनका इसमें शामिल होना जलवायु परिवर्तन संबंधी लक्ष्यों को पाने के लिए कितना जरूरी है। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी से जुड़े पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञों डॉ. एलिक्स डाइजेल व डॉ. कैथरीना रिचर का कहना है कि ऐसी स्थिति में यह उम्मीद बेमानी है कि कोई आवाज सुनी जाएगी।
कॉप-28 में ये थे शामिल
कॉप-28 में 25 हजार लोग विभिन्न देशों के आधिकारिक प्रतिनिधि थे। 900 कॉप के आयोजक यूएनएफसीसीसी के सदस्य थे। इसके अलावा यूएन, डब्ल्यूएचओ, वर्ल्ड बैंक आदि के प्रतिनिधियों की संख्या 55,000 के करीब थी। बाकी में एनजीओ, पुरस्कार विजेता, मेजबा के मेहमान आदि थे। लंबी कतारों से बैठकों में देरी तो होती ही है, भीड़भाड़ से बातचीत में भी बाधा पैदा होती है। विशेषज्ञों ने इससे बचने के लिए ऑनलाइन आयोजनों की सलाह दी है।