पाकिस्तान में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में एक विश्लेषक ने खुलेआम देश में तानाशाही वापस लाने की वकालत की। इसको लेकर देश में तीखा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान में तानाशाही शासन का लंबा दौर रहा है। इसलिए इस अपील को ज्यादातर लोगों ने हलके से नहीं लिया। बल्कि ये कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर स्तंभकार और टीवी टीकाकार हसन निसार ने ऐसी टिप्पणी की। निसार की टिप्पणी पर पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर संग्राम छिड़ा हुआ है।
हसन निसार भड़काऊ बातों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि सोमवार को उन्होंने सारी सीमाएं लांघ दीं। उन्होंने कहा कि देश कई गहरी समस्याओं से घिरा हुआ है। इसका एक ही समाधान है कि कम से कम 15 साल के लिए देश में तानाशाही व्यवस्था कायम कर दी जाए। उन्होंने कहा- ‘जो लोग लोकतंत्र की मांग करते हैं, उन्हें गोली मार दी जानी चाहिए। उन गोलियों की कीमत उनके परिजनों से वसूल की जानी चाहिए।’
निसार ने कुछ ऐसी बातें कहीं, जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्रियों बेनजीर भुट्टो और नवाज शरीफ के उत्तराधिकारियों पर निशाना समझा गया है। उन्होंने कहा- ‘क्या ये बच्चे देश को अपने हाथ में ले लेंगे और इसे चलाएंगे?’ चर्चा के दौरान निसार से दो टूक सवाल पूछा गया कि क्या वे पाकिस्तान पर तानाशाही थोपने की वकालत कर रहे हैं, तो गुस्से से तमतमाते हुए उन्होंने कहा- ‘और कोई चारा नहीं है। तानाशाही नहीं लाई गई, तो देश का विनाश तमाम हदों को पार कर जाएगा।’
इसके बाद टीवी डिबेट को संचालित कर रहे एंकर ने हसन निसार से पूछा कि क्या प्रधानमंत्री इमरान खान को पांच साल एक और कार्यकाल मिलना चाहिए। इस पर निसार ने कहा- ‘मेरी राय में उन्हें भी पांच साल और मिलने चाहिए। उन्हें ये कार्यकाल देना हमारा नैतिक फर्ज है।’ निसार की इस टिप्पणी को लेकर सबसे ज्यादा कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ प्रतिक्रियाओं में पूछा गया है कि क्या निसार इमरान खान की तरफ से बैटिंग कर रहे थे?