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पाकिस्तान: तानाशाही वापस लाने की खुलेआम मांग पर सोशल मीडिया पर छिड़ा संग्राम

Wed, 05 Jan 2022 07:28 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

हसन निसार भड़काऊ बातों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि सोमवार को उन्होंने सारी सीमाएं लांघ दीं। उन्होंने कहा कि देश कई गहरी समस्याओं से घिरा हुआ है। इसका एक ही समाधान है कि कम से कम 15 साल के लिए देश में तानाशाही व्यवस्था कायम कर दी जाए...
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इमरान खान और हसन निसार - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पाकिस्तान में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में एक विश्लेषक ने खुलेआम देश में तानाशाही वापस लाने की वकालत की। इसको लेकर देश में तीखा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान में तानाशाही शासन का लंबा दौर रहा है। इसलिए इस अपील को ज्यादातर लोगों ने हलके से नहीं लिया। बल्कि ये कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर स्तंभकार और टीवी टीकाकार हसन निसार ने ऐसी टिप्पणी की। निसार की टिप्पणी पर पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर संग्राम छिड़ा हुआ है।

15 साल के लिए हो तानाशाही

हसन निसार भड़काऊ बातों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि सोमवार को उन्होंने सारी सीमाएं लांघ दीं। उन्होंने कहा कि देश कई गहरी समस्याओं से घिरा हुआ है। इसका एक ही समाधान है कि कम से कम 15 साल के लिए देश में तानाशाही व्यवस्था कायम कर दी जाए। उन्होंने कहा- ‘जो लोग लोकतंत्र की मांग करते हैं, उन्हें गोली मार दी जानी चाहिए। उन गोलियों की कीमत उनके परिजनों से वसूल की जानी चाहिए।’

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पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक सोशल मीडिया पर अनेक लोगों ने इस बयान को हिंसा के लिए खुला आह्वान बताया है। उन्होंने इसे लेकर हसन निसार के साथ-साथ उस टीवी चैनल पर भी कार्रवाई की मांग की है, जिसने ये डिबेट प्रसारित किया। निसार ने कहा कि एक ‘अत्याचारी शासक’ ही देश के सिस्टम को दुरुस्त कर सकता है। वही प्राइमरी शिक्षा से लेकर जनसंख्या प्रबंधन तक की समस्याओं को हल कर सकता है।

उत्तराधिकारियों पर निशाना

निसार ने कुछ ऐसी बातें कहीं, जिन्हें पूर्व प्रधानमंत्रियों बेनजीर भुट्टो और नवाज शरीफ के उत्तराधिकारियों पर निशाना समझा गया है। उन्होंने कहा- ‘क्या ये बच्चे देश को अपने हाथ में ले लेंगे और इसे चलाएंगे?’ चर्चा के दौरान निसार से दो टूक सवाल पूछा गया कि क्या वे पाकिस्तान पर तानाशाही थोपने की वकालत कर रहे हैं, तो गुस्से से तमतमाते हुए उन्होंने कहा- ‘और कोई चारा नहीं है। तानाशाही नहीं लाई गई, तो देश का विनाश तमाम हदों को पार कर जाएगा।’

इसके बाद टीवी डिबेट को संचालित कर रहे एंकर ने हसन निसार से पूछा कि क्या प्रधानमंत्री इमरान खान को पांच साल एक और कार्यकाल मिलना चाहिए। इस पर निसार ने कहा- ‘मेरी राय में उन्हें भी पांच साल और मिलने चाहिए। उन्हें ये कार्यकाल देना हमारा नैतिक फर्ज है।’ निसार की इस टिप्पणी को लेकर सबसे ज्यादा कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ प्रतिक्रियाओं में पूछा गया है कि क्या निसार इमरान खान की तरफ से बैटिंग कर रहे थे?

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सोशल मीडिया पर एक अन्य टिप्पणी में कहा गया- ‘सार्वजनिक टीवी पर हसन निसार जो रहे हैं, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। हिंसा के लिए लोगों को उकसाना किसी रूप में अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है। यह व्यक्ति खुलेआम फासीवाद का उपदेश दे रहा है।’ समाजशास्त्री निदा किरमानी ने एक ट्विट में कहा- ‘हसन निसार लोगों से उन लोगों को उन लोगों को गोली मार देने के लिए कह रहे हैं, जो लोकतंत्र का समर्थन करते हैं। इस सरकार की नीतियों की आलोचना करने की वजह से अली वजीर एक साल से ज्यादा समय से जेल में हैं।’ गौरतलब है कि अली वजीर पश्तून तहफूज मूवमेंट नाम की पार्टी के नेता हैं।

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