कई मोर्चों पर बढ़ती मुसीबत के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को एक और तगड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग की एक जांच समिति ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने विदेशी नागरिकों और कंपनियों से धन हासिल किया। उसने उस रकम की जानकारी सरकारी एजेंसियों को नहीं दी। हाल के स्थानीय चुनावों में पीटीआई की करारी और देश में बढ़ती आर्थिक मुश्किलों को संभालने में सरकार की नाकामी के बीच इस ताजा घटनाक्रम से इमरान खान के सामने एक नई गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने कहा है कि निर्वाचन आयोग की जांच समिति ने जो रिपोर्ट सौंपी, उसकी कॉपी उसके पास मौजूद है। उसके मुताबिक पीटीआई ने बीते 2009-10 से 2012-13 के बीच विदेश से मिले 31 करोड़ 20 लाख रुपये की सूचना नहीं दी। पार्टी को सिर्फ 2012-13 में ही साढ़े 14 करोड़ रुपये मिले थे, जिसे उसने गुप्त रखा। रिपोर्ट में पीटीआई के खातों के ऑडिट रिपोर्ट संबंधी सर्टिफिकेट्स पर भी सवाल उठाए गए हैं। ये सर्टिफिकेट इमरान खान के दस्तखत से निर्वाचन आयोग को सौंपे गए थे।
पीटीआई को इस मुद्दे पर देश में सियासी तूफान उठने का अंदाजा है। इसलिए अखबार डॉन में खबर छपने के तुरंत बाद संघीय सरकार के मंत्रियों ने अपनी पार्टी के बचाव की मुहिम छेड़ दी। सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर रिपोर्ट को ‘गलत’ बताया। साथ ही उन्होंने मांग की कि सभी पार्टियों को मिले विदेशी चंदे की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में एक ही ट्रांजैक्शन (लेन-देन) को दो बार गिना गया है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि तथ्यों की ऐसी भूल की तरफ इशारा करने का मकसद रिपोर्ट की साख को संदिग्ध बनाना है।