श्रीलंका में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे सरकार से लोगों की टूटती उम्मीदों के बीच विपक्ष ने वैकल्पिक सरकार बनाने की पेशकश कर दी है। समझा जाता है कि इससे देश में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी, जो पहले से ही गहरी चिंता का विषय बनी हुई है।
दिसानायके के इस बयान ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा की है। समझा जाता है कि राष्ट्रपति राजपक्षे को हटाने के लिए बीते तीन महीनों से आंदोलन चला रहे संगठनों का समर्थन एनपीपी को मिल सकता है। इन संगठनों का कहना है कि गोटबया राजपक्षे और उनक परिवार मौजूदा आर्थिक संकट के लिए जिम्मेदार है। इसलिए सुधार की दिशा में तभी पहल होगी, जब इस परिवार को सत्ता से बाहर कर दिया जाएगा।
जेवीपी वामपंथी रुझान वाली पार्टी है। मार्क्सवादी- लेनिनवादी विचारों वाली ये पार्टी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से किसी तरह की मदद लेने के खिलाफ है। गोटबया- विक्रमसिंघे सरकार आईएमएफ से कर्ज लेने के लिए बातचीत चला रही है। विश्लेषकों के मुताबिक एनपीपी के पास संसद में समर्थन नहीं है। लेकिन सत्ताधारी गठबंधन के सदस्यों को साथ लेकर अगर उसने वर्तमान सरकार को गिराने की कोशिश की, तो उससे अस्थिरता बढ़ेगी। उस स्थिति में वर्तमान सरकार के लिए आईएमएफ से कर्ज प्राप्त करना और मुश्किल हो जाएगा।
समझा जाता है कि इसी हालत को देखते हुए एनपीपी ने सरकार बनाने की बात कही है। दिसानायके ने कहा है- ‘हमें जैसा चाहते हैं, वैसी सरकार बनाने दीजिए। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हम आज सरकार बना लेंगे और कल संकट को हल कर देंगे। लेकिन हम देश को वह दिशा दे सकते हैं, जिसमें बच्चों का सड़कों पर मरना रुके, जिससे देश की अर्थव्यवस्था ढहने से बच सके। हम ये जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं।’
इस बीच संसद में प्रमुख विपक्षी नेता सजित प्रेमदासा ने सरकार विरोधी आंदोलनकारियों से संवाद बनाने की शुरुआत की है। इस सिलसिले में उन्होंने कई आंदोलनकारियों से मुलाकात की है। उनमें कुछ वे प्रदर्शनकारी भी हैं, जिन्होंने एक विरोध स्थल पर प्रेमदासा पर हमला किया था। प्रेमदासा ने कहा है- सबका पहला मकसद यह है कि लोगों की जान बचे। कैसी भी हिंसा हो, वह लोगों की आवाज को नहीं दबा सकती।