पोलैंड की राजधानी वॉरसा में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के दिए पुतिन विरोधी बयान से उठा बवाल अभी जारी है। बाइडन के बयान का यह अर्थ निकाला गया कि अमेरिका अब रूस में सत्ता बदलने की नीति पर चल रहा है। इस अचानक दिए बयान से न सिर्फ अमेरिका के सहयोगी देशों, बल्कि खुद अमेरिका के लिए भी असहज स्थिति पैदा हुई है। यहां पर्यवेक्षकों की राय है कि अगर युद्ध का माहौल नहीं होता, इस बयान के कारण अमेरिका में भी बाइडन चौतरफा आलोचनाओं से घिर गए होते।
इसे समझते हुए ही इस्राइल यात्रा पर गए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने यरुशलम में ही पत्रकारों के सामने आ कर सफाई दी- ‘रूस में सत्ता बदलने की हमारी कोई रणनीति नहीं है। यह काम रूस के लोगों का है।’ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को चेतावनी दी कि अमेरिका को सत्ता बदल जैसी किसी कोशिश में शामिल नहीं होना चाहिए। बाइडन के बयान के बारे में जब पत्रकारों ने सवाल किया, तो मैक्रों ने कहा- ‘मैं ऐसी भाषा कभी नहीं बोलता।’ उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य कूटनीतिक रास्तों से युद्धविराम लागू करवाना और फिर यूक्रेन से रूसी सैनिकों की वापसी सुनिश्चित कराना है।
इस बीच अमेरिकी अधिकारियों ने सफाई दी है कि बाइडन को जो कहा, वह उनके पहले से तैयार 27 मिनट के भाषण का हिस्सा नहीं था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा कि जो भाषण टेलीप्रॉम्पटर पर था, उसमें वह वाक्य शामिल नहीं था। इसके पहले व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने मीडिया ब्रीफिंग में सफाई दी थी- ‘राष्ट्रपति बाइडन यह कहना चाहते थे कि पुतिन को अपने पास-पड़ोस के क्षेत्र में ताकत का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। वे रूस में पुतिन की सत्ता की बात नहीं कर रहे थे। उन्होंने रूस में सत्ता बदलने की बात नहीं की।’
अब अमेरिकी विशेषज्ञों के बीच बाइडन के इस बयान के संभावित परिणामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। आम राय यह सामने आई है कि परिणाम इस पर निर्भर करेगा कि रूस ने इस बयान को कितनी गंभीरता से लिया है। थिंक टैंक काउंसिल फॉर फॉरेन रिलेशंस के अध्यक्ष रिचर्ड हास ने एक ट्विट में कहा- ‘व्हाइट हाउस के सफाई देने के बाद यह मामला शांत हो जाएगा। व्हाइट हाउस की सफाई को पुतिन अपनी इस राय की पुष्टि मानेंगे कि अमेरिका उनके देश से युद्ध नहीं करेगा। लेकिन अनुशासन में खामी से युद्ध का दायरा और अवधि में विस्तार होने का खतरा पैदा होता है।’