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Myanmar: पैदा हो रहे हैं गृह युद्ध जैसे हालात, बागी गुटों का फैल रहा है दायरा

Thu, 02 Jun 2022 05:31 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून

सार

विश्लेषकों की राय है कि सेना अपने खिलाफ फैल रही सशस्त्र बगावत से परेशान है। इसीलिए उसने नए चुनाव का चारा फेंका है। खबरों के मुताबिक बागी गुट अब देश के ज्यादा बड़े इलाके में सरकारी ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। इससे देश में गृह युद्ध की सूरत बनती जा रही है...
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म्यांमार की सेना - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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म्यामांर में सेना और सैनिक शासन विरोधी गुटों के बीच सशस्त्र संघर्ष का दायरा बढ़ने के संकेत हैं। खबरों के मुताबिक आम तौर पर म्यांमार में मानसून आने के बाद पहाड़ी इलाकों में लड़ाई थम जाती है, लेकिन इस साल वहां दोनों तरफ से जारी हमलों में कोई कमी आने का अनुमान नहीं है। मई की शुरुआत से ही देश के इस हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश हो रही है। मगर इस दौरान भी हमले जारी रहे हैं। फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने निर्वाचित सरकार को हटा कर सत्ता संभाल ली थी। उसके बाद से कई हथियारबंद गुटों के साथ उसकी लड़ाई चल रही है। इस कारण हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। अब कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि आने वाले कुछ महीने इस लड़ाई में निर्णायक साबित हो सकते हैं। संकेत हैं कि बागी गुट अब भारी पड़ रहे हैं। कम-से-कम इतना तो साफ हो चुका है कि इन गुटों का सफाया करने में म्यांमार की सेना नाकाम रही है।

सेना ने दिया नए चुनावों का झांसा

वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सैन्य शासन को चुनौती दे रहे मुख्य हथियारबंद गुट पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज (पीडीएफ) के सदस्यों की संख्या हाल में बढ़ रही है। साथ ही यह अब बेहतर हथियार पाने और अपनी कार्रवाइयों को बेहतर ढंग से संगठित करने में सक्षम हो गया है। पीडीएफ ने अगस्त 2023 में नए चुनाव कराने की सैनिक शासन की घोषणा को ठुकरा दिया है। सैनिक शासन ने एलान किया है कि ये चुनाव नए नियमों के तहत कराए जाएंगे। जबकि आलोचकों का कहना है कि ये नए नियम सेना को लाभ की स्थिति में रखने के मकसद से तय किए गए हैं।

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कुछ विश्लेषकों की राय है कि सेना अपने खिलाफ फैल रही सशस्त्र बगावत से परेशान है। इसीलिए उसने नए चुनाव का चारा फेंका है। खबरों के मुताबिक बागी गुट अब देश के ज्यादा बड़े इलाके में सरकारी ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। इससे देश में गृह युद्ध की सूरत बनती जा रही है। वैसे अभी भी इस लड़ाई का प्रमुख केंद्र पश्चिमी म्यांमार के सगैन्ग और मागवे क्षेत्र बने हुए हैं। ये दोनों इलाके परंपरागत रूप से आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी का गढ़ रहे हैं। ये क्षेत्र मध्य म्यांमार में स्थित मंडाले इलाके से जुड़ा हुआ है।

तेज होगा गृह युद्ध

मानसून के पहले इन इलाकों में दोनों तरफ से हथियारबंद कार्रवाइयां हुईं। उस दौरान ये सामने आया कि सेना के जवाबी हमलों के कारण पीडीएफ को नुकसान हुआ, लेकिन सेना ज्यादा समय तक अपनी बढ़त बनाए रखने में नाकाम रही। वह इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ नहीं बना पाई है। संकेत हैं कि सेना की कार्रवाइयों से पीडीएफ ने सीख ली। उसके बाद उसने हमलों को अधिक व्यवस्थित किया है। यह संकेत भी है कि पीडीएफ अब स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है। सरकार विरोधी गुटों की तरफ से बनाई गई वैकल्पिक सरकार- नेशनल यूनिट गर्वनमेंट (एनयूजी) का अब उस पर संभवतः कोई नियंत्रण नहीं है। एनयूजी अहिंसक संघर्ष की समर्थक समझी जाती है। इन घटनाक्रमों की वजह से पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में म्यांमार में गृह युद्ध और तेज होगा। फिलहाल पीडीएफ का मनोबल बढ़ा हुआ है, जबकि सैन्य शासन उसे कुचलने पर आमादा है।

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