पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने लॉन्ग मार्च को दोबारा शुरू करने का कार्यक्रम दो दिन टाल दिया, लेकिन आंदोलन को खत्म करने की कई हलकों से की जा रही अपीलों को उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने सिरे से ठुकरा दिया है। लॉन्ग मार्च अब वजीराबाद से गुरुवार को शुरू होगा। बीते हफ्ते वहीं इमरान खान पर गोलियां चलाई गई थीं, जिसके बाद मार्च रोक दिया गया। पहले इसे मंगलवार से दोबारा शुरू करने की घोषणा हुई थी, लेकिन सोमवार देर शाम इसे दो दिन और टालने की घोषणा की गई।
इस बीच इमरान ने दो टूक चेतावनी दी है कि अब देश के सामने बैलेट या ब्लडशेड (चुनाव या खूनखराबा) में किसी एक को चुनने का विकल्प ही बचा है। समझा जाता है कि ऐसे बयान देकर इमरान खान ‘एस्टेब्लिशमेंट’ को खुली चुनौती दे रहे हैं। पाकिस्तान में सेना और खुफिया तंत्र को एस्टेब्लिशमेंट के नाम से जाना जाता है और आम राय है कि सत्ता के असल सूत्र उसके ही हाथ में होते हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान खान को पुराने तजुर्बों के आधार पर ये अहसास है कि शहबाज शरीफ सरकार के हाथ में असल सत्ता नहीं है। इसलिए उन्होंने सरकार और एस्टेब्लिशमेंट दोनों के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोल रखा है। इससे देश में तनाव बढ़ता जा रहा है। जाने-माने राजनीति शास्त्री डॉ. हसन अस्करी ने कहा है कि ऐसे माहौल का स्वाभाविक परिणाम टकराव के रूप में सामने आएगा।
पांव में गोली लगने के बाद इमरान खान ने जिस तरह के बयान दिए हैं, उनका जिक्र करते हुए प्रो. अस्करी ने अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा- ‘इमरान सरकार के साथ-साथ सेना को भी चुनौती दे रहे हैं, क्योंकि उनकी राय है कि इस खेल के असली खिलाड़ी सेना ही है।’ प्रो. अस्करी ने कहा कि इन हालात का क्या नतीजा होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है, लेकिन स्थितियां टकराव की तरफ जा रही हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान की असल समस्या यह है कि यहां नागरिक शासन की सर्वोच्चता कभी नहीं रही। सेना के वर्चस्व से इसके पहले तत्कालीन प्रधानमंत्रियों जुल्फिकार अली भुट्टो और बेनजीर भुट्टो के साथ-साथ नवाज शरीफ को भी उलझना पड़ा था। इस साल अप्रैल में जिस तरह से अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पीटीआई सरकार को घेरा गया, उसके लिए इमरान खान ने एस्टेब्लिशमेंट को दोषी माना। उसका ही नतीजा अभी टकराव की राजनीति के रूप में देखने को मिल रहा है।
टीकाकारों के मुताबिक ये हालात उस समय बने हैं, जब पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट में है। सियासी टकराव के कारण देश में अस्थिरता का माहौल गहरा रहा है और उससे आर्थिक मसले और गंभीर रूप ले रहे हैं। इस बीच अंदेशा है कि गुरुवार को लॉन्ग मार्च के फिर शुरू होने शहबाज सरकार पर दबाव और बढ़ जाएगा।
इस बीच इमरान खान ने राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। अल्वी पीटीआई से संबंधित रहे हैं। लेकिन रविवार को जिस लहजे में इमरान खान ने उन्हें पत्र लिखा, उससे संकेत मिला है कि खान राष्ट्रपति से खुश नहीं हैं। पाकिस्तानी अखबारों में मंगलवार सुबह छपी खबर के मुताबिक इसमें खान ने कहा है कि देश में झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, लोगों को परेशान किया जा रहा है, गिरफ्तारियां हो रही हैं और पुलिस हिरासत में यातनाएं दी जा रही हैं।
उन्होंने राष्ट्रपति से इन सबको रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की है। जबकि पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान में राष्ट्रपति सिर्फ संवैधानिक प्रमुख होते हैं और वे सीधे राजकाज में दखल नहीं दे सकते।