अमेरिका में सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए मंगलवार की रात को (भारतीय समय के अनुसार बुधवार दोपहर तक) उसके बुरे सपने सच हो कर सामने आ सकते हैं। मंगलवार को (भारतीय समय के अनुसार मंगलवार रात) अमेरिका में मिड टर्म चुनावों के लिए मतदान होगा। भारतीय समय के अनुसार बुधवार सुबह साढ़े पांच बजे के बाद मतगणना होगी और दोपहर तक नतीजे सामने आएंगे। आम अनुमान है कि राष्ट्रपति जो बाइडन की पार्टी को इन नतीजों से झटका लगेगा।
सोमवार को तमाम मीडिया संस्थानों का अनुमान रहा कि चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में माहौल रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में झुकता चला गया। इससे उत्साहित पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे 15 नवंबर को एक बड़ी सूचना देश को देंगे। समझा जाता है कि उस दिन वे 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी का एलान करेंगे। सोमवार को मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि चुनाव प्रचार के आखिरी हफ्ते में रिपब्लिकन पार्टी के अंदर खास कर ट्रंप समर्थकों की स्थिति अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत हुई है।
टीवी चैनल सीएनएन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि 40 साल की सबसे ज्यादा महंगाई ने डेमोक्रेटिक पार्टी के खिलाफ माहौल बना दिया। इस कारण ये अनुमान मजबूत हुआ कि कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में ये पार्टी अपना बहुमत गंवा देगी। संभव है कि ऊपरी सदन सीनेट में भी रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत बन जाए। सीएनएन वेबसाइट पर एक विश्लेषण में कहा गया है- ‘अगर डेमोक्रेटिक पार्टी की बुरी हार हुई, तो सबसे ज्यादा अंगुलियां बाइडन पर उठेंगी। पार्टी के अंदर कहा जाएगा कि बाइडन लोगों को उचित संदेश देने में नाकाम रहे।’
रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने कहा है कि उन्होंने उन मुद्दों की बात की है, जिनसे मतदाता चिंतित हैं। यह दावा करते हुए पार्टी की नेशनल कमेटी के अध्यक्ष रोना मैक्डैनियल ने सीएनएन के एक कार्यक्रम में कहा- ‘डेमोक्रेटिक पार्टी महंगाई से इनकार करती रही, वह बढ़े अपराध से इनकार करती रही, उसे शिक्षा की चिंता नहीं है।’ इसी कार्यक्रम में डेमोक्रेटिक पार्टी की सलाहकार हिलेरी रॉसेन ने स्वीकार किया कि सत्ताधारी दल मतदाताओं के मूड को भांपने में नाकाम रहा।
डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से दो बार राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर दावा जता चुके सीनेटर बर्नी सैंडर्स हाल के हफ्तों में बार-बार राष्ट्रपति से अपील करते रहे कि वे महंगाई के मुद्दे पर ठोस कदम उठाएं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बाइडन की रणनीति लोकतंत्र के लिए रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से आ रहे कथित खतरे को मुद्दा बनाने पर टिकी रही, जबकि मतदाता उनके ऐसे बयानों से प्रभावित नहीं हुए।
इस बात की पुष्टि विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों से हुई है। औसतन 53 फीसदी मतदातओं ने महंगाई को अपने लिए सर्व प्रमुख मुद्दा माना है और राय जताई है कि बाइडन प्रशासन अर्थव्यवस्था को संभालने में नाकाम रहा है। सीएनएन की चर्चा में कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि बाइडन प्रशासन का आर्थिक प्रबंधन वास्तव में उतना बुरा नहीं है, लेकिन मतदाता खुद पर बड़े आर्थिक बोझ से परेशान हैं। उनके पास राष्ट्रपति के तर्कों को सुनने का वक्त नहीं है। यही बात संभवतः चुनाव परिणामों में झलकेगी।