पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश में विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए एक इंटरनेशनल टेलीथॉन के जरिए पांच अरब रुपये जुटाने का दावा किया है।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख खान ने सोमवार को आयोजित टेलीथॉन (दान हेतु धन संग्रह के लिए लंबा कार्यक्रम) के दौरान कहा कि इसका उद्देश्य बाढ़ पीड़ितों के लिए धन जुटाना है क्योंकि कोई भी सरकार अकेले इस तरह की तबाही से नहीं निपट सकती है।
इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत और पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए धन की मांग करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय अपील की थी। इस समय पूरा देश बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है।
पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार ने खान के हवाले से कहा कि शुरुआती आकलन के मुताबिक बाढ़ से एक हजार अरब रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है और अबतक एक हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि उन्हें पाकिस्तानियों से बहुत सारे फोन कॉल आए जिनमें प्रवासी भी शामिल थे जो बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहते थे।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग पंजाब और खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत की सरकारों द्वारा खोले गए दो बैंक खातों में दान कर सकते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि देशभर में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए धन खर्च किया जाएगा।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देशभर में मरने वालों की संख्या सोमवार तक 1,136 हो गई है, जिसमें 1634 से अधिक घायल और 33 मिलियन (3 करोड़ 30 लाख) से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
संघीय योजना और विशेष पहल मंत्री अहसान इकबाल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में बाढ़ से शुरुआती आर्थिक नुकसान कम से कम 10 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि असामान्य मानसून की बारिश के कारण हुई अभूतपूर्व बाढ़ ने सड़कों, फसलों, बुनियादी ढांचे और पुलों को बहा दिया है। बाढ़ से 33 मिलियन से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
पाकिस्तान में मानसून का मौसम जुलाई से सितंबर तक चलता है। इस साल मानसून और प्री-मानसून बारिश ने पाकिस्तान में तीस साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया और एनडीएमए के आंकड़ों से पता चलता है कि 30 साल की औसत बारिश 130.8 मिलीमीटर थी लेकिन 2022 सीजन में बारिश 375.4 मिलीमीटर थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इकबाल ने कहा कि 200 मिलियन लोगों के राष्ट्र के पुनर्निर्माण और पुनर्वास में पांच साल तक लग सकते हैं। देश भोजन की कमी की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है।