पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान
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पाकिस्तान में जारी सियासी टकराव के बीच अब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ एक नई चुनौती पेश कर दी है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के रुख से यह लगता है कि हाल में उसके खिलाफ सरकार की तरफ शुरू की गई कार्रवाइयों का उस पर कोई असर नहीं हुआ है। पार्टी ने अब 17 शहरों में विशाल जन सभाएं करने का कार्यक्रम घोषित किया है। इस सिलसिले में पहली रैली 21 अगस्त को होगी।
इस बीच इमरान खान ने ‘न्यूट्रल्स’ से भी अपील की है कि वह समय रहते अपनी नीतियों की समीक्षा कर ले। इमरान खान ऐस्टैबलिशमेंट यानी सेना और खुफिया तंत्र के नेतृत्व को इसी नाम से संबोधित करते हैं। समझा जाता है कि पाकिस्तान की असल सत्ता ऐस्टैबलिशमेंट के हाथ में रहती है। अपनी ताजा अपील के जरिए इमरान खान ने ऐस्टैबलिशमेंट से यह कहा है कि वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाले पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) को सत्ता में बनाए रखने की अपनी जिद छोड़ दे। खान ने ऐस्टैबलिशमेंट को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक पाकिस्तान में नए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव नहीं होते हैं, देश में अस्थिरता बनी रहेगी।
देश भर में एक के बाद एक रैली आयोजित करने के कार्यक्रम की घोषणा पीटीआई के मीडिया डिपार्टमेंट ने की है। इसके मुताबिक पहली रैली 21 अगस्त को रावलपिंडी में होगी। उसके बाद 24 अगस्त को हरिपुर में और 26 अगस्त को कराची में रैली होगी। पार्टी ने दावा किया है कि कराची रैली में लोगों के आने का नया रिकॉर्ड बनेगा। इन तमाम रैलियों को इमरान खान संबोधित करेंगे। इस सिलसिले की आखिरी रैली 11 सितंबर को बलूचिस्तान के क्वेटा में होगी।
उधर इस्लामाबाद में प्रेस की स्वतंत्रता विषय पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए इमरान खान ने एक बार फिर सेना और खुफिया एजेंसी आईएसएआई को निशाने पर लिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस बात की चर्चा की कि ऐस्टैबलिशमेंट ने उनके सामने नेताओं के भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। तब आईएसआई के अधिकारियों ने उन्हें पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेताओं के भ्रष्टाचार का विवरण दिया था। अभी ये दोनों पार्टियां पीडीएम में शामिल हैं।
इमरान खान ने कहा- ‘जब उन्होंने मुझे यह बताया, तो मैंने पूछा कि अगर आपको यह सब मामलूम है, तो आपने उन्हें सत्ता में क्यों आने दिया। तब मुझे लगा था कि ये लोग अब कुछ कदम उठाएंगे। लेकिन अफसोस की बात है कि ऐसा नहीं हुआ।’
इमरान खान ने ‘न्यूट्रल्स’ को संबोधित करते हुए पूछा- ‘क्या आप देश को लेकर चिंतित हैं। क्या आपको को मालूम है कि देश किधर जा रहा है।’ पर्यवेक्षकों की राय है कि इन सवालों के साथ इमरान खान ने ‘न्यूट्रल्स’ को जनमत के कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। जिस समय ये धारणा बन गई है कि सेना का हाथ शहबाज शरीफ सरकार की पीठ पर है और दोनों मिल कर काम कर रहे हैं, इमरान खान ने सीधे ‘न्यूट्रल्स’ पर निशाना साधने का दांव चला है।