पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से अटक जेल में शीर्ष जांच एजेंसियों ने पूछताछ की। इस दौरान उन्होंने राजनयिक ‘केबल’ (गुप्त संदेश) की प्रति खोने की बात स्वीकार कर ली है। बता दें, खान पर पहले से ही दस्तावेज के गलत उपयोग के लिए आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज है।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) की आतंकवाद विरोधी शाखा (सीटीडब्ल्यू) ने शनिवार को जेल में पूर्व प्रधानमंत्री से मुलाकात की। एफआईए के उपनिदेशक अयाज खान के नेतृत्व में छह सदस्यीय संयुक्त जांच दल ने अटक जेल के उपाधीक्षक के कार्यालय में खान से एक घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की।
सिफर लहराने से इनकार
पूछताछ के दौरान खान ने सिफर खोने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि उन्हें याद नहीं है कि सिफर को कहां रखा है। खान ने इस बात से भी इनकार किया कि पिछले साल अपनी सरकार को हटाने से कुछ दिन पहले उन्होंने एक सार्वजनिक सभा में साजिश के सबूत के तौर पर जो कागज लहराया था, वह राजनयिक केबल था। खान ने कहा कि जनता के सामने जो कागज दिखाया था, वह कैबिनेट बैठक के मिनट्स थे, कोई सिफर नहीं।
शीर्ष एजेंसी की जांच से खुलासा
एजेंसी ने जांच के बाद सिफर के दुरुपयोग और इसके गलत इस्तेमाल में उनकी जानबूझकर संलिप्तता का पता चलने के बाद खान और पीटीआई के उपाध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव आजम खान, पूर्व योजना मंत्री असद उमर और इसमें शामिल अन्य सहयोगियों की भूमिका जांच के दौरान निर्धारित की जाएगी।
यह है मामला
गौरतलब है, एक अमेरिकी मीडिया संस्थान द्वारा गुप्त केबल की कथित प्रति प्रकाशित किए जाने के बाद खान जांच के घेरे में आ गए थे और शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में कई लोगों ने लीक का स्रोत होने को लेकर पीटीआई प्रमुख पर अंगुली उठाई थी। पूर्व गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह ने कहा था कि अगर खान ने वास्तव में उन्हें प्रदान किए गए केबल की प्रति खो दी है, तो यह आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत अपराध होगा। खान इस महीने की शुरुआत में भ्रष्टाचार के एक मामले में एक सत्र अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद से तीन साल जेल की सजा काट रहे हैं।
जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के उपाध्यक्ष कुरैशी (67) को 19 अगस्त को शासकीय गोपनीयता अधिनियम के उल्लंघन के लिए गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि विदेश मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अमेरिका स्थित पाकिस्तानी दूतावास की ओर से विदेश कार्यालय को भेजे गए आधिकारिक दस्तावेज की गोपनीयता भंग की थी। बाद में उन्हें विशेष अदालत ने 25 अगस्त तक चार दिनों के लिए संघीय जांच एजेंसी (एफएआई) की हिरासत में भेज दिया था।
खान लंबे समय से लापता दस्तावेज का उल्लेख पिछले साल अप्रैल में उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए विदेशी साजिश के सबूत के रूप में करते रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जज अबुअल हसनत ने शुक्रवार को विशेष अदालत में मामले की बंद कमरे में सुनवाई की थी। इस अदालत को हाल ही में सांसदों के भारी विरोध के बीच इस महीने की शुरुआत में संसद द्वारा अनुमोदित आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था।
20 अगस्त को संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद कुरेशी को फ्रंटियर कोर और इस्लामाबाद पुलिस कर्मियों द्वारा भारी सुरक्षा में न्यायिक परिसर में पेश किया गया था। उनका प्रतिनिधित्व उनके वकील शोएब शाहीन ने किया, जिन्होंने एफआईए द्वारा कुरेशी की शारीरिक रिमांड का विरोध किया।
मामले के विशेष अभियोजक जुल्फिकार नकवी ने पीटीआई नेता की नौ दिन की रिमांड की मांग की थी। हालांकि, न्यायाधीश ने कुरैशी को तीन दिन के लिए एफआईए की हिरासत में भेज दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत सिफर मामले में पीटीआई अध्यक्ष इमरान खान और उनके डिप्टी कुरैशी का मुकदमा एक पखवाड़े के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।