जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर निशाना साधते हुए कहा है कि जनरल सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सेना का अपमान कर रहे हैं और राष्ट्रीय हितों की बलि दे रहे हैं।
इमरान खान ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, देश मुनीर के कानून के तहत चल रहा है और आईएसआई उसे संरक्षण दे रही है। वह सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए हर राष्ट्रीय हित की बलि देने को तैयार हैं। यह सेना प्रमुख सेना का अपमान वैसे ही कर रहे हैं जैसे याह्या खान ने कभी किया था। बता दें कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल याह्या खान के शासन में पूर्वी पाकिस्तान में गृहयुद्ध हुआ था। जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का उदय हुआ था।
इमरान खान की यह बयान अगले महीने शुरू होने वाले "कठपुतली सरकार" के खिलाफ उनकी पार्टी के अभियान से पहले आई है। इमरान खान ने कहा कि इस समय सीनेट, नेशनल असेंबली, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सभी असंवैधानिक हैं। एक दिखावटी संवैधानिक अदालत बनाई गई। जिससे संसद में हमारी सीटें कम हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की सीटें प्रतिद्वंद्वियों को सौंप दी गईं और अदालतें अब मुनीर के लोगों से भरी हुई हैं।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त सिकंदर सुल्तान राजा पर ऐतिहासिक चुनावी धोखाधड़ी करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, इस्लामाबाद हाईकोर्ट का एक न्यायाधीश सात महीने से मेरी अपीलों पर सुनवाई नहीं कर रहा है क्योंकि उसे भी मुनीर से निर्देश मिलते हैं। इस समय हमारे देश में मुनीर का कानून चलता है, मानो पाकिस्तान उसका अपना हो।
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'मैं मुनीर की राजशाही को स्वीकार करने के बजाय मरना पसंद करूंगा'
इमरान खान ने कहा कि न्यायपालिका, राज्य संस्थाओं और लोकतंत्र को व्यवस्थित रूप से ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, सैन्य अदालतों को वैध घोषित कर दिया गया है, जो वास्तव में न्यायपालिका द्वारा स्वयं के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव है। मेरी पत्नी बुशरा बीबी को मुझे तोड़ने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन मैं यह बिल्कुल स्पष्ट कर दूं, मैं मुनीर की राजशाही को स्वीकार करने के बजाय मरना पसंद करूंगा।
इमरान खान ने कहा कि एक राष्ट्र तब बर्बाद हो जाता है जब अक्षम लोगों को बलपूर्वक संस्थाओं पर थोपा जाता है। अपने साथ हुई यातनाओं के बारे में बात करते हुए, खान ने कहा कि उन्हें दिन में 22 घंटे एकांत कारावास में रखा जाता था और किताबें, अखबार और टेलीविजन देखने से मना कर दिया जाता था। खान ने कहा कि उन्होंने अपने बेटों से कहा है कि वे इस मामले को मौलिक मानवाधिकारों के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयों में ले जाएं।
उन्होंने आगे कहा, वे अमेरिका में किसी से मदद नहीं मांग रहे हैं। वे केवल अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। जब राष्ट्रपति ट्रंप पहली बार सत्ता में आए थे, तब भी मैंने कहा था कि पाकिस्तान के बारे में फैसले पाकिस्तान में ही लिए जाने चाहिए। हमने हर दरवाज़ा खटखटाया है, लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी।